केवीके चंबा के निकरा मॉडल को सम्मान

नौणी—डा. वाईएस परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के अधीन कृषि विज्ञान केंद्र चंबा को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के नेशनल इनोवेशन इन क्लाइमेट रेसिलिएंट एग्रीकल्चर परियोजना को चंबा जिला के लग्गा गांव में सफल कार्यान्वयन के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया है। निकरा, आईसीएआर द्वारा वित्त पोषित परियोजना है जिसे वर्ष 2011 में पूरे भारत में 100 कृषि विज्ञान केंद्र में शुरू किया गया था। हिमाचल प्रदेश के चार कृषि विज्ञान केंद्र भी इस परियोजना के लिए चुने गए थे। इन केंद्रों में प्रचलित जलवायु भेद्यता को संबोधित करने के लिए परियोजना शुरू की गई थी। इस परियोजना के तहत पानी की कमी, सूखा, विलंबित मानसून, शीत लहर, ओलावृष्टि और लंबे समय तक मौसम की अस्थिरता को संबोधित किया गया। हाल ही में हैदराबाद के शुष्क कृषि के लिए केंद्रीय अनुसंधान संस्थान में आयोजित कृषि विज्ञान केंद्रों की वार्षिक समीक्षा कार्यशाला के दौरान केवीके चंबा के निकरा मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया। इस कार्यशाला में देश भर के 121 केवीके के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। वैज्ञानिक व निकरा के नोडल अधिकारी डा. केहर सिंह ठाकुर ने इस कार्यशाला में केवीके चंबा का प्रतिनिधित्व किया और कार्यशाला में एक पोस्टर और मौखिक प्रस्तुति दी। डीडीजी (कृषि विस्तार) डा. एके सिंह ने डा. ठाकुर को जोन -1 का सर्वश्रेष्ठ निकरा पुरस्कार से नावाजा। इस कार्यशाला में डा. ठाकुर को सर्वश्रेष्ठ पोस्टर प्रस्तुति का पुरस्कार भी अपने नाम किया। डा. ठाकुर ने 2011 से परियोजना से जुड़े सभी लोगों को यह पुरस्कार समर्पित किया, विशेषकर लग्गा गांव के किसानों को। नौणी विवि के कुलपति डा. एचसी शर्मा और अन्य संकाय ने केवीके चंबा की टीम को उनकी इस उपलब्धि पर बधाई दी। इस परियोजना के तहत, केवीके चंबा ने ग्राम लग्गा जो की जिला चंबा के मेहला ब्लॉक के अंतर्गत आता है में कई हस्तक्षेप किए। इसमें सात छोटे गांव जैसे लग्गा, पुधरीन, घटी, ओसल, हाथला, शाक्ला और प्रेछा शामिल हैं। पहले चरण (2011-2016) में, 102 परिवारों का चयन किया गया जिसके तहत 89 हैकटैर भूमि को परियोजना के विभिन्न हस्तक्षेपों के अंतर्गत लाया गया। चार मॉड्यूल-प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, फसल उत्पादन, पशुधन और मत्स्य पालन और क्षमता निर्माण इस परियोजना के तहत शामिल किए गए। इन चयनित गांवों में विभिन्न हस्तक्षेप /प्रदर्शन लगाए गए। वर्ष 2018में पांच और गांवों को अपनाया गया।

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