कैप्टन अमरिंदर से तनाव के बीच राहुल गांधी से मिले सिद्धू

पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ जारी तनाव के बीच राज्य सरकार में मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू ने सोमवार को दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष को एक खत भी सौंपा है। सिद्धू ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और अहमद पटेल के साथ मुलाकात की तस्वीर को ट्वीट करते हुए लिखा कि उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष को खत सौंपा है और उन्हें हालात से अवगत कराया है। हालांकि, उन्होंने यह नहीं जाहिर किया कि खत में क्या लिखा है। बता दें कि बीते काफी दिनों से नवजोत सिंह सिद्धू और पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के बीच रिश्ते तनावभरे हैं। पाकिस्तानी बता दें कि बीते काफी दिनों से नवजोत सिंह सिद्धू और पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के बीच रिश्ते तनावभरे हैं। सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा से उनकी झप्पी और पाक पीएम इमरान की जबतब तारीफ पर कैप्टन अमरिंदर अपनी असहमति जाहिर कर चुके हैं। दोनों के बीच तनाव सबसे पहले तब जाहिर हुआ जब कुछ महीने पहले सिद्धू ने कहा था कि उनका कैप्टन सिर्फ एक हैं और वह हैं राहुल गांधी। सिद्धू के इस बयान के बाद पंजाब सरकार के कुछ मंत्रियों ने उनके खिलाफ आवाज बुलंद की थी और उन्हें मंत्रिमंडल से बर्खास्त करने तक की मांग की थी। हालिया लोकसभा चुनाव में सूबे में पार्टी के उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं करने से दोनों के बीच तनाव काफी बढ़ गया है। कैप्टन सूबे के शहरी इलाकों में कांग्रेस के ‘खराब प्रदर्शन’ को लेकर सिद्धू से नाराज हैं। दूसरी तरफ, सिद्धू के बागी तेवर बरकरार है। चुनाव नतीजों के बाद पंजाब कैबिनेट की पहली बैठक में भी वह शामिल नहीं हुए थे। कैबिनेट मीटिंग में सिद्धू के नहीं आने के बाद कैप्टन ने उन्हें पहला झटका तब दिया, जब पिछले गुरुवार को उन्होंने अपने मंत्रिपरिषद में फेरबदल किया। सिद्धू से महत्वपूर्ण स्थानीय शासन, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्रालय छीन लिया गया और उन्हें बिजली और नवीन एवं अक्षय ऊर्जा विभाग का प्रभार दिया गया। हालांकि, सिद्धू ने अपना नया प्रभार अभी तक नहीं संभाला है। ऐसी अटकलें भी चल रही हैं कि मनपसंद मंत्रालय छिने जाने से नाराज सिद्धू कैप्टन कैबिनेट से इस्तीफा दे सकते हैं। नए मंत्रालय का अबतक चार्ज न संभालने की वजह से भी ऐसी अटकलों को बल मिला है। कैप्टन ने सिद्धू को दूसरा झटका तब दिया जब उन्होंने अपनी सरकार के कामकाज में तेजी लाने के लिए 8 सलाहकार समूहों का गठन किया लेकिन उसमें सिद्धू को शामिल नहीं किया। बता दें कि लोकसभा चुनाव में पंजाब में सत्ताधारी कांग्रेस ने कुल 13 में से 8 सीटों पर जीत हासिल की थी। बीजेपी-अकाली गठबंधन ने 4 और आम आदमी पार्टी ने एक सीट पर जीत दर्ज की थी। 

 
 
 

 

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