कोर्ट नहीं, पंचायतों में निपटाएं छोटे झगड़े

जस्टिस चौधरी बोले; सुलझाए झगड़ों का प्रचार नहीं, गोपनीय बनी रहती है

कुल्लू —लोगों को उनके छोटे-मोटे झगड़े पंचायत स्तर पर निपटा लेने चाहिएं। इसके लिए कोर्ट नहीं आना चाहिए। यह बात हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति धर्म चंद चौधरी ने कही। उन्होंने कहा कि पक्षकारों को मध्यस्थता पर पूर्ण भरोसा हो, ऐसी व्यवस्था को प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए। किसी भी पक्ष की ओर से किसी प्रकार का दबाव मान्य नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि मध्यस्थकारों को किसी भी विवाद का निपटारा करते समय इसे निजी विवाद के तौर पर देखना चाहिए और तभी एक संतोषजनक समाधान संभव है। रविवार को यहां आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति धर्मचंद चौधरी ने कहा कि वैकल्पिक विवाद समाधान की विविध प्रक्रिया मौजूद है, जिसमें मध्यस्थता, लोक अदालतें तथा आपसी सुलह विशेष तौर पर चलन में है और हर रोज सैकड़ों विवादों का समाधान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मध्यस्थता से विवाद समाधान के दौरान पक्षकर किसी तीसरे व्यक्ति के हस्तक्षेप के माध्यम से तथा न्यायालय का सहारा लिए बिना आपसी झड़ों का निवारण करते हैं। इसमें मध्यस्थ दोनों पक्षों को सुनने के पश्चात अर्द्ध-न्यायिक ढंग से मामले का निर्णय करता है। जस्टिस चौधरी ने कहा कि हमारे देश में विवाद सुलझाने की यह प्रक्रिया कोई नई नहीं है। सदियों से ग्रामीण स्तर पर पंच अथवा सर्वमान्य व्यक्ति दो पक्षों के बीच के झगड़ों का निपटारा करते आ रहे हैं।  उन्होंने कहा कि समाधानकर्ता की मदद से पक्षकरों द्वारा विवादों का निपटारा सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न होता है। यह प्रक्रिया अत्यधिक सरल और सस्ती है। इसमें दोनों पक्षों की सहमति होती है, इसलिए प्रक्रिया संतोषप्रद भी है। कार्यवाही के दौरान विवाद का प्रचार नहीं होता और गोपनीयता सुनिश्चित रहती है।

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