कौशल विकास की नई अहमियत

डा. जयंतीलाल भंडारी

विख्यात अर्थशास्त्री

 

हाल ही में 9 जून को जापान के शहर फुकुओका में आयोजित जी-20 देशों के वित्त मंत्रियों और दुनिया के शीर्ष वित्तीय नीति निर्माताओं की शिखर बैठक में पहली बार जापान सहित दुनिया के विभिन्न देशों में बुजुर्गों की बढ़ती संख्या और युवा कार्यबल में तेजी से आती हुई कमी के मद्देनजर कौशल विकास की अहमियत और रोजगार प्रणाली में बदलाव की जरूरत बताई गई। उल्लेखनीय है कि जापान के प्रसिद्ध उद्यमी हिरोयुकी तायकुची सान ने पिछले दिनों भारत की कौशल प्रशिक्षित नई पीढ़ी के लिए जापान में रोजगार की नई संभावनाओं को रेखांकित किया है। हिरोयुकी ने कहा कि जापान की बुजुर्ग होती जनसंख्या और जापान में जन्म दर गिरने की वजह से जापान में पेशेवरों की सबसे अधिक जरूरत है…

इन दिनों प्रकाशित हो रही राष्ट्रीय और वैश्विक रोजगार रिपोर्टों में भारत की कौशल विकास से दक्ष नई पीढ़ी के लिए चमकीली संभावनाएं बताई जा रही हैं। इन अध्ययन रिपोर्टों में कहा जा रहा है कि भारत नई पीढ़ी के कौशल विकास से देश की रोजगार समस्याओं का निराकरण कर सकता है और नई पीढ़ी के रोजगार से अर्थव्यवस्था को भी मजबूत बना सकता है। हाल ही में दुनिया के ख्याति प्राप्त मानव संसाधन परामर्श संगठन कॉर्न फेरी की रिपोर्ट में कहा गया है कि जहां दुनिया में 2030 तक कुशल कामगारों का संकट होगा, वहीं भारत के पास 24.5 करोड़ अतिरिक्त कुशल कामगार होंगे। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2030 तक दुनिया के 19 विकसित और विकासशील देशों में 8.52 करोड़ कुशल श्रमशक्ति की कमी होगी। दुनिया में भारत इकलौता देश होगा, जिसके पास 2030 तक जरूरत से ज्यादा कुशल कामगार होंगे। ऐसे में भारत विश्व के तमाम देशों में कुशल कामगारों को भेजकर फायदा उठा सकेगा।

हाल ही में 9 जून को जापान के शहर फुकुओका में आयोजित जी-20 देशों के वित्त मंत्रियों और दुनिया के शीर्ष वित्तीय नीति निर्माताओं की शिखर बैठक में पहली बार जापान सहित दुनिया के विभिन्न देशों में बुजुर्गों की बढ़ती संख्या और युवा कार्यबल में तेजी से आती हुई कमी के मद्देनजर कौशल विकास की अहमियत और रोजगार प्रणाली में बदलाव की जरूरत बताई गई। उल्लेखनीय है कि जापान के प्रसिद्ध उद्यमी हिरोयुकी तायकुची सान ने पिछले दिनों भारत की कौशल प्रशिक्षित नई पीढ़ी के लिए जापान में रोजगार की नई संभावनाओं को रेखांकित किया है। हिरोयुकी ने कहा कि जापान की बुजुर्ग होती जनसंख्या और जापान में जन्म दर गिरने की वजह से जापान में पेशेवरों की सबसे अधिक जरूरत है। ऐसे में जापान में जहां जापान सरकार की एजेंसी जापान विदेश व्यापार संगठन (जेईटीआरओ) के द्वारा वर्ष 2020 तक दो लाख भारतीय पेशेवरों की पूर्ति के लिए कार्ययोजना बनाई गई है, वहीं जापान के निजी क्षेत्र ने तीन लाख भारतीय पेशेवरों की जरूरत प्रस्तुत की है। ऐसे में दो साल में पांच लाख भारतीय पेशेवर जापान में अच्छा रोजगार प्राप्त कर सकेंगे। यह बात भी महत्त्वपूर्ण है कि अब तक अमरीका सहित कई देशों में लंबे समय से निवास करने वाले, उन निवासियों के पारिवारिक संबंधों के आधार पर तथा सस्ती मजदूरी पर काम करने वाले लोगों को नागरिकता और वीजा दिए जाने में प्राथमिकता दी जाती थी, लेकिन अब अमरीका और विभिन्न विकसित देशों में उनके नवनिर्माण और विकास में योगदान दे सकने वाली विदेशी प्रतिभावान नई पीढ़ी को प्राथमिकता दिए जाने का परिदृश्य दिखाई दे रहा है। ऐसे में भारत की नई पेशेवर पीढ़ी की नई चमकीली संभावनाएं दिखाई दे रही हैं। पिछले माह 17 मई को अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने योग्यता आधारित एवं अंक आधारित जो नई आव्रजन नीति (इमिग्रेशन पालिसी) पेश की है, उसके तहत मौजूदा ग्रीन कार्ड की जगह ‘बिल्ड अमरीका’ वीजा लाने का प्रस्ताव रखा गया है। अमरीका की इस नीति के तहत युवा एवं उच्च दक्ष पेशेवरों के लिए वीजा आरक्षण 12 प्रतिशत से बढ़कर 57 प्रतिशत हो जाएगा। अब नई बिल्ड अमरीका व्यवस्था से उन हजारों भारतीय पेशेवरों और दक्ष कर्मियों को लाभ होने की उम्मीद है, जो औसतन करीब एक दशक से अधिक समय से ग्रीन कार्ड के लिए इंतजार कर रहे हैं। इस प्रकार स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि इस समय देश में रोजगार के परिप्रेक्ष्य में दो परिदृश्य उभरकर दिखाई दे रहे हैं। एक, देश में तेजी से बढ़ती हुई बेरोजगारी और दूसरा, कौशल विकास से रोजगार के अवसरों के तेजी से बढ़ने की संभावनाएं।

पिछले दिनों 31 मई को केंद्रीय सांख्यिकीय कार्यालय ने श्रमबल के नवीनतम आंकड़े जारी करते हुए कहा है कि वर्ष 2017-18 के दौरान देश में बेरोजगारी की दर 6.1 फीसदी रही है। देश में बेरोजगारी की यह दर 45 साल में सर्वाधिक है। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा रोजगार के अवसर और कौशल विकास बढ़ाने के लिए 5 जून को देश में पहली बार रोजगार और कौशल विकास जैसे अहम मुद्दे पर कैबिनेट समिति का गठन किया गया है। इसमें कोई दोमत नहीं है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में श्रम का आधिक्य है, लेकिन कौशल की काफी कमी है। उच्च शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण से सजे-धजे भारतीय युवाओं के लिए देश-विदेश में नौकरियों की कमी नहीं है, लेकिन नौकरियों की योग्यता के अभाव में इस समय ऊंची-ऊंची डिग्री रखने वाले युवा भी नौकरियों से दूर हैं।

यदि हम चाहते हैं कि देश के अधिकांश युवाओं को रोजगार मिले और भारतीय प्रतिभाएं देश की मिट्टी को सोना बना दें, तो जरूरी होगा कि उच्च शिक्षा की गुणवत्ता पर ध्यान देकर उच्च शिक्षित युवाओं को रोजगार के योग्य बनाया जाए तथा सामान्य योग्यता वाले भारतीय युवाओं को कौशल प्रशिक्षण से सुसज्जित करने के साथ-साथ कार्यक्षम भी बनाया जाए। निश्चित रूप से आने वाले वर्षों में भारत की नई पीढ़ी के लिए सभी दूर बदलते वैश्विक एवं तकनीकी परिवर्तनों के कारण अच्छी संभावनाएं हैं। हम आशा करें कि नई मोदी-2 सरकार देश और दुनिया की जरूरतों के मुताबिक देश की युवा आबादी को कौशल प्रशिक्षण से सुसज्जित करके कार्यक्षम बनाने की नई रणनीति के साथ आगे बढ़ेगी, जिससे देश की नई पीढ़ी के लिए देश और दुनिया में रोजगार के अवसरों में वृद्धि होगी तथा देश विकास की डगर पर आगे बढ़ेगा।

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