खड्डों में मौत से खेल

चुवाड़ी—भटियात में जुलसा देने वाली गर्मी का टैंपरेंचर में हुई बढ़ोतरी के चलते क्षेत्र की खड्डों व डिव्बरों में जान जोखिम में डाल कर नहाने वाले किशोर व युवाओं की टोलीया आम देखी जा रही है।  पानी के सम्मोहन में फंसे युवा और किशोर नहाने के लिए जान दांव पर लगाकर खड्डों व डिव्बरों  में खतरे की छलांग लगाते हैं। दरअसल जैसे ही गर्मियां शुरू होती हैं, प्रदेश  की नदियों, खड्डों और नहरों से मातम की खबरें आने लगती हैं। चिलचिलाती धूप में पानी गजब का सम्मोहन पैदा करता है। इस सम्मोहन में फंसे युवा और किशोर नहाने के लिए जान दांव पर लगाकर नदियों और नहरों में खतरे की छलांग लगाते हैं। इनमें से कई ऐसे होते हैं जो छलांग के बाद फिर उबर नहीं पाते।  लगातार हादसों के बावजूद स्कूलों से छुट्टी के बाद इन कच्ची उम्र के बच्चे  टोलियों में इन खड्डों का रुख करने से गुरेज नहीं करते हैं, जिसके चलते थोड़ी सी चुक बडे़ हादसे का कारण बन जाती है। जल.धाराओं  और खड्डों  के किनारे गांवों और बस्तियों के लोगों को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए, क्योंकि सवाल हमारे युवाओं और बच्चों की सुरक्षा का है। उधर एसडीएम भटियात मेजर डाक्टर  अवनिंदर कुमार का कहना है कि प्रशासन के साथ सभी की नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि वह बच्चों को ऐसी खतरनाक जगहों पर जाने से रोके ताकि कोई अप्रिय घटना नहीं घट सके।

जान जोखिम में डाल करते हैं रुख

भटियात में गर्मी के चलते  युवा नहरों और दरियाओं का रुख करने लगते हैं। बावजूद इसके युवक पानी में कूदते हैं और कई बार जान से भी हाथ धो बैठते हैं। भटियात की इन  खड्डों में चक्की, कलम व  बराहल  के साथ ही  एरिया जहां नहाने वालों का जमघट लगाता है जैसे  चुवाड़ी के समीप नोले की  डिव्बर, ददरियाडा पुल के पास,  होबार खड्ड के समीप ए बनेट खड्ड के समीप, सियुणी पुल के पास और गौड खड्ड में रश बराबर बना रहता है। बीते दिनों में एक सात वर्ष के  मासूम बच्चे की कलम खड्ड में डूबने के दर्दनाक हादसे ने इलाकाबासियों को झंकोर दिया और इससे पहले भी चक्की खड्ड में पिकनिक मनाने परिवार संग आई महिला के डूब जाने की घटना भी घट चुकी है।

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