खाद्य सुरक्षा के नाम पर जनता से धोखा

सिर्फ लाइसेंस बनाकर हो रही खानापूर्ति, फूड सेफ्टी में देश भर में 18वें रैंक पर हिमाचल

मंडी —हरियाणा में हाल ही में चाउमीन खाने के बाद बच्चे का फेफड़ा फटने की खबर से हर कोई सकते में है, तो वहीं खाद्य सुरक्षा के लिहाज से हिमाचलवासियों को भी अलर्ट रहना होगा। ऐसा इसलिए, क्योंकि खाने की सेहत जांचने वाला महकमे की सेहत बुरी तरह बिगड़ी चुकी है। देश में हिमाचल फूड सेफ्टी इंडेक्स में बुरी तरह पिछड़ गया है। हिमाचल की आबोहवा के लिए पर्यटक देश और विदेश के कोने-कोने से यहां पहुंचते हैं, लेकिन देवभूमि में खाद्य सुरक्षा के नाम पर सेहत से खिलवाड़ किया जा रहा है।  स्वास्थ्य सुविधाओं में हमेशा पहले दो पायदान पर रहने वाला हिमाचल प्रदेश फूड सेफ्टी इंडेक्स में देश भर में 18वें रैंक पर है। वह भी तब जब स्वास्थ्य विभाग के तहत आने वाला फूड सेफ्टी एंड रेगुलेशन डिपार्टमेंट हर साल करोड़ों का राजस्व दे रहा है। मतलब यह कि जनता से पैसा तो लिया जा रहा है, लेकिन उनकी सुरक्षा की गारंटी नहीं ले रहा। यह काफी चिंताजनक स्थिति है, क्योंकि रजिस्ट्रेशन और लाइसेंस को छोड़ धरातल पर कुछ काम नहीं हो रहा है। इस फेहरिस्त में गोआ जैसा छोटा राज्य टॉप पर है, जबकि हिमाचल को 18वीं रैंक मिली है। ऐसे में बाजार में उपभोक्ता क्या खरीद रहे हैं, उनकी गुणवत्ता कैसी है और क्या मानक होने चाहिए, इस पर नजर ही नहीं रखी जा रही। केवल मात्र फूड सेफ्टी एंड रेगुलेशन डिपार्टमेंट रजिस्ट्रेशन और लाइसेंस कर ही काम चला रहा है।  यही नहीं, हर साल कोरड़ों रुपए राजस्व देने वाला यह महकमा दस जिलों में मात्र असिस्टेंट कमीश्नर के सहारे ही चल रहा है। खाद्य पदार्थों के सैंपल भरने के लिए प्रदेश में केवल दो ही फूड सेफ्टी अफसर फिलवक्त तैनात हैं।

कैसे दौड़ेगी गुणवत्ता की रेल

विभाग में स्टाफ तो है ही नहीं, ऊपर से असिस्टेंट कमिश्नर्ज के पास इंस्पेकशन के लिए गाड़ी भी नहीं है। अब जितनी ज्यादा इंस्पेकशन होगी, उतनी ही खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की रेल दौड़ेगी।

सोस में था ज्यादा ऐसिड

चाउमीन खाने के बाद जिस बच्चे का फेफड़ा फटा था। बताया जा रहा है कि चाउमीन में मिलाए गए सोस में एसिड अधिक था। ऐसे में आप अंदाजा लगा लें खाद्य सुरक्षा के लिए लगातार इंस्पेकशन और सैंपलिंग कितनी जरूरी है।

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