खुशखबरी; लोगों को मिल गया वनाधिकार

शिमला —हिमाचल प्रदेश में सालों से लंबित पडे़ लोगों के वन अधिकार के मामलों को अब जल्द निपटा दिया जाएगा, जिनको लोगों के उनके आसपास के जंगलों में फोरेस्ट हैं, उनको सरकार उनका अधिकार प्रदान करेगी। इस संबंध में राज्य स्तरीय मॉनिटरिंग कमेटी ने अहम फैसले लिए हैं। करीब 10 साल से भी ज्यादा समय से प्रदेश में वनाधिकार प्राप्ति के मामले लंबित पड़े हैं, जिनको निपटाया नहीं जा सका था। इसमें कई तरह की कानूनी अड़चनें थीं, जिनको अब दूर किया जा चुका है। इन अड़चनों के दूर होने के बाद राज्य स्तर पर बनाई गई उच्चाधिकारियों की कमेटी ने साफ कर दिया है कि लोगों को उनके अधिकार समय पर दिए जाएंगे। सूत्रों के अनुसार इस कमेटी ने सभी जिलाधीशों को तुरंत लंबित मामलों को निपटाने के लिए कहा है। उन्हें हर महीने  कमेटी को निपटाए गए मामलों और नए आने वाले मामलों पर विस्तृत रिपोर्ट देने को कहा गया है, जो जिलाधीश हर महीने इस संबंध में अपनी रिपोर्ट नहीं देंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई भी हो सकती है। इससे पहले संबंधित अधिकारियों को फोरेस्ट राइट एक्ट के बारे में प्रशिक्षित भी किया जाएगा। इनको प्रशिक्षण के दौरान बताया जाएगा कि उन्हें किस तरह से लोगों के अधिकारों को देखना है और कैसे उनके मामलों का निपटान करना है। मंडी, कुल्लू व लाहुल-स्पीति के अफसरों को इसके बारे में सबसे पहले प्रशिक्षित किया जाएगा। उन्हें इसकी विस्तृत जानकारी देने के बाद शेष जिलों में भी अधिकारियों को प्रशिक्षित किया जाएगा। इस प्रक्रिया से पूरे जिलों के अधिकारियों को अवगत कराया जाएगा, ताकि आसानी से फोरेस्ट राइट एक्ट के मामलों को निपटाया जा सके। प्रदेश में 2319 मामले अभी तक लंबित पड़े हैं, जिनमें सबसे अधिक मामले जनजातीय जिलों के हैं। यहां पर लोगों ने फोरेस्ट राइट हासिल करने के लिए अपने दावे कर रखे हैं परंतु कानूनी अड़चनों के चलते विभाग ने इन्हें नहीं निपटाया। इसके लिए बनाई गई राज्य स्तरीय कमेटी में अतिरिक्त मुख्य सचिव राजस्व, अतिरिक्त मुख्य सचिव वन, प्रधान सचिव जनजातीय विकास, सचिव पंचायती राज, प्रधान मुख्य अरण्यपाल वन, जिलाधीश किन्नौर व ट्राइबल एडवाइजरी कमेटी के सदस्यों को इसमें शामिल किया गया है, जिन्होंने सभी जिलों के मामलों पर विस्तार से चर्चा की।

 

 

 

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