खेतों में मिलेगी खेती की ट्रेनिंग

सरकार ने प्रदेश भर में जीरो बजट कृषि के प्रसार को बनाई विशेष योजना

 सोलन —प्रदेश सरकार की महत्त्वाकांक्षी योजना जीरो बजट खेती का प्रशिक्षण किसानों को अब खेतों में जाकर ही दिया जाएगा। जैविक व जीरो बजट खेती के प्रति किसानों के बढ़ रहे रूझान को देखते हुए सरकार ने निर्णय लिया है कि कृषि विशेषज्ञों की टीम किसानों को खेतों में पहुंचकर प्रशिक्षण प्रदान करेगी। प्रदेश भर में एक वर्ष के भीतर ही कुल 2669  किसानों ने जीरो बजट खेती को एक मॉडल के रूप में विकसित किया है। इनमें से 321 सर्वश्रेष्ठ किसानों का चयन करके उन्हें सरकार द्वारा प्रशिक्षित किया जा रहा है। इस प्रशिक्षण के बाद विभागीय कर्मचारियों सहित इन सर्वश्रेष्ठ किसानों को भी फील्ड में उतारा जाएगा। इस प्रोजेक्ट को सरकार अब इस वर्ष व्यापक तौर पर गांव-गांव में शुरू करना चाहती है। जानकारी के मुताबिक इस मॉडल से कुल 50 हजार किसानों को इस योजना से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। किसानों को दी जाने वाली खेतों में ट्रेनिंग का प्रमुख पहलू यह है कि यह प्रशिक्षण मात्र मासिक नहीं होगा तथा न ही सिर्फ औपचारिकता निभाई जाएगी। इसके तहत एक दिन में 13 से 15 घंटे तक किसानों को उनके खेतों में ही प्रशिक्षित किया जाएगा। जीरो बजट खेती को सिरमौर, पालमपुर, सोलन के साथ-साथ सबसे अधिक रूझान शिमला जिला से मिला है। शिमला जिला में अभी तक 272 किसानों ने इसको मॉडल के रूप में स्थापित किया है। प्रदेश में कुल 19700 गांव हैं तथा सरकार की नई योजना के तहत अब 10 राजस्व गांवों का एक क्लस्टर बनाकर स्तही तौर पर कार्य किया जाएगा। पहला बड़ा प्रशिक्षण पालमपुर में 28 जून से तीन जुलाई तक चलेगा। अनुमान के अनुसार इसमें 900 के करीब किसान व 140 अधिकारी शामिल होंगे।

50 हजार किसानों को योजना से जोड़ने का लक्ष्य

जीरो बजट खेती के कार्यकारी निदेशक डा. राजेश्वर चंदेल ने कहा कि प्रदेश के किसानों की इस प्राकृतिक व शून्य लागत खेती के प्रति बढ़ते रूझान को देखते हुए इस वर्ष कुल 50 हजार किसानों को इससे जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने कहा कि इसके लिए खेत-खेत पहुंचकर किसानों को कड़े प्रशिक्षण दिए जा रहे हैं।

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