गुरुद्वारा श्री दशमेश अस्थान में मनाया गुरु अर्जुन देव का 413 वां शहीदी दिवस

नाहन —ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री दशमेश अस्थान नाहन में सिक्खों के पांचवें गुरु अर्जुन देव का 413वां शहीदी दिवस श्रद्धा के साथ मनाया गया। सिक्ख समुदाय ने इस दौरान गुरु अर्जुन देव जी के शहीदी दिवस पर अंखड पाठ, कीर्तन और अटूट लंगर का ऐतिहासिक गुरुद्वारे मंे आयोजन किया। सिक्खों के सभी दस गुरुओं में गुरुदेव अर्जुन देव का अहम स्थान है। वहीं 15 अप्रैल 1563 को गोइंदवाल साहिब में सिक्खों के चौथे गुरु रामदासजी के घर गुरु अर्जुन देव का जन्म हुआ। गुरु अर्जुन देव को जानकारी अनुसार 1581 मंे पांचवंे सिक्खों के गुरु के रूप में नियुक्त किया गया। सिक्खों के पांचवें गुरु अर्जुन देव जी को शांति पुंज के नाम से भी जाना जाता है। उन्होंने वह सभी गुरु जो उनसे पहले हुए के उपदेशों को संजोया तथा अपने अहम योगदान के तहत गुरुगं्रथ साहिब में इनका संकलन किया। गुरु अर्जुन देव जी ने 1588 में श्री हरमंदिर साहिब की नींव रखी, जिसे आज गोल्डन टैंपल अमृतसर के नाम से जाना जाता है। गुरुद्वारों में चार दरवाजों को स्थापित करने की रूपरेखा गुरु अर्जुन देव जी ने तैयार की, जिसके पीछे तर्क था कि गुरु अर्जुन देव सभी धर्मो और जातियों पर विश्वास करते थे। भले ही वह किसी भी दिशा से आया हो तथा कहीं भी अपना शीश झुकाता हो। सिक्खों के पांचवे गुरु अर्जुन देव जी को जहांगीर के शासन काल में कूटनीति से जहांगीर के आदेश पर शहीद कर दिया गया। जानकारी के अनुसार 1606 में जहांगीर के आदेश पर उन्हें गर्म तवे पर बिठाया गया तथा गर्म-गर्म रेत उनके शरीर पर डाली गई। वहीं जब गुरु का शरीर पूरी तरह जल गया तो उन्हें रावी नदी में नहाने के लिए भेजा गया। ठंडी रावी नदी मंे गुरु अर्जुन देव जी का शरीर विलुप्त हो गया। यहां स्थान अब पाकिस्तान मंे है तथा इस स्थान पर गुरुद्वारा डेरा सहिब भी स्थापित है।

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