गोलियों से नहीं वोटों से पहुंचेगा जम्मू-कश्मीर नई ऊंचाइयों पर: मलिक

 

गोलियों से नहीं वोटों से पहुंचेगा जम्मू-कश्मीर नयी ऊंचाइयों पर: मलिक

 जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्य पाल मलिक ने बुधवार को कहा कि गोलियों से कुछ भी हासिल नहीं होने वाला है और मतदान की मदद से ही राज्य को नयी ऊंचाइयों पर ले जाया जा सकता है।श्री मलिक ने संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि बड़ी अजीब बात है कि पाकिस्तान आतंकवादियों को प्रशिक्षित कर लगातार जम्मू-कश्मीर में भेज रहा है।राज्यपाल ने कहा, “ हिंसा से कुछ भी हासिल नहीं किया जा सकता बावजूद इसके पड़ोसी देश अभी भी आतंकवादियों को प्रशिक्षित कर जम्मू-कश्मीर में भेज रहा है,जबकि नये स्थानीय लड़कों के आतंकवाद से जुड़ने में कमी आई है।”श्री मलिक ने कहा कि यहां तक कि पाकिस्तान के एक पूर्व राष्ट्रपति ने जम्मू-कश्मीर के नेताओं से एक बार कहा था कि वह कुछ नहीं कर सकते हैं और उन्हें तंत्र से जो भी मिल रहा है, उसे स्वीकार किया जाना चाहिए।उन्होंने कहा कि पाकिस्तान स्वयं गहरे संकट में फंसा हुआ है और वह यह मानता है कि कुछ भी हासिल नहीं हो सकता। इसके बावजूद आतंकवादियों को भेजने में जुटा हुआ है, लेकिन “हमारे सुरक्षा बलों की मुस्तैदी आतंकवादियों का सीमा या 10 किलोमीटर के दायरे में सफाया कर रही है। यदि कुछ रिहायशी इलाकों में घुस गए हैं तो उनका भी सफाया किया जा रहा है।”राज्यपाल ने कहा कि श्रीलंका में शक्तिशाली लिट्टे जिसे 10 देशों का समर्थन था, हिंसा से कुछ हासिल नहीं कर पाया और उसका अंत हो गया। उन्होंने कहा आतंकवादी कश्मीर में उतने शक्तिशाली नहीं है और यह उनके हित में है कि वे आतंकवाद की राह छोड़कर मुख्य धारा में लौट आयें।राज्यपाल ने कहा कि स्थानीय लोगों और अन्य के प्रयास से अब बड़ी संख्या में स्थानीय युवा आतंकवाद से नहीं जुड़ रहे हैं। इसके अलावा युवा भी अब यह महसूस करने लगे हैं कि हिंसा से कुछ हासिल होने वाला नहीं है। केंद्र सरकार ने इन युवाओं के पुनर्वास के लिए कई नीतियों का एलान किया है जिससे कि वह हिंसा का रास्ता छोड़कर नये सिरे से अपना जीवन शुरू करें। विदेशी आतंकवादियों और स्थानीय में केवल यह अंतर हैं कि स्थानीय आतंकवादी कुछ घंटों की कार्रवाई में ही मारे जाते हैं जबकि पड़ोसी देश से आने वालों को निपटाने में कुछ दिन लग जाते हैं।राज्य की जनता मीडिया और राजनीतिक दलों से सहयोग का आग्रह करते हुए श्री मलिक ने कहा कि लोगों को इस दिशा में काम करना चाहिए कि चुनावों में राज्य में मतदान का प्रतिशत बढ़े। चुनाव में बड़ी संख्या में मतदाता हिस्सा नहीं लेते हैं और मतदान में मात्र 10 या उससे कुछ अधिक प्रतिशत मतों से लोग जीत जाते हैं। उन्हें कहा,“ हमें लोगों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में हिस्सा लेने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।”राज्य में विधानसभा चुनावों के बारे में पूछे गए सवाल पर श्री मलिक दोहराया कि वह इस पर कुछ नहीं कह सकते हैं। चुनाव कराना चुनाव आयोग का काम है और वह ही यह फैसला करेगा कि यह कब कराये जायें। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्रीय गृह मंत्रालय राज्य विधानसभा में चुनाव करने के लिए भी सिफारिश करेगा।

 

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