ग्लोबल वार्मिंग से बचाएगी प्राकृतिक खेती

कृषि विश्वविद्यालय में राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने किया प्रशिक्षण कार्यशाला का उद्घाटन

पालमपुर -रासायनिक और जैविक ख्ेाती से उत्पादन कम होता है खरपतवार बढ़ेगा तथा यह ख्ेाती हानिकारक है और आर्थिक रूप से महंगी है । वहीं, सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती में उत्पादन ज्यादा और लगत कम होती है तथा किसानों के लिए बहुत लाभदायक है। यह बात राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना के तहत प्रदेश में शुरू की गई सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती के प्रसार के लिए प्रदेश कृषि विवि में शुरू हुई छह दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला के उद्घाटन के अवसर पर कही। आचार्य देवव्रत ने कहा कि रसायनों के कारण दस हजार पशु, पक्षियों, जीव-जंतुओं की प्रजातियां विलुप्त हो गई हैं। पद्मश्री सुभाष पालेकर ने कहा कि विश्व के सामने ग्लोबल वार्मिंग की समस्या बनी हुई है। रसायनिक खेती और जैविक कृषि में प्रयोग होने वाली खाद, कीटनाशक और अन्य आदान ग्लोबल वार्मिंग को बढ़ा रहे हैं। श्री पालेकर ने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग से बचने के लिए केवल प्राकृतिक खेती विकल्प है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पदाधिकारियों के साथ भी उनकी बैठक हुई है, जिसमें कृषि विश्वविद्यालयों में प्राकृतिक खेती को सिलेबस के रूप में शामिल करने की बात कही गई है। कृषि मंत्री डा. रामलाल मारकंडा ने कहा कि इस वर्ष 50 हजार किसानों को इस खेती पद्धति के तहत लाने का लक्ष्य रखा गया है और 2022 तक प्रदेश के सभी नौ लाख 61 हजार किसानों को इस खेती पद्धति के तहत लाने का प्रयास किया जाएगा, जो किसान प्राकृतिक खेती को अपनाएंगे, उन्हें सरकार की ओर से देसी गाय और खेती में प्रयोग होने वाले उपकरणों के लिए सबसिडी दी जाएगी। इस मौके पर राज्यपाल ने सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती पर आधारित छह पुस्तकों का विमोचन किया।

 

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