घर ढहा, शैड में कट रहे दिन

गगरेट —समाज की अंतिम पंक्ति में खडे़ व्यक्ति को ध्यान में रख बनाई गई सरकारी योजनाएं अगर वास्तव में पात्र लोगों तक पहुंच जाएं तो शायद इस देश की तस्वीर बदल जाए। विकट परिस्थिति यह है कि इन योजनाओं का लाभ लेने का सपना देखने वाले इनकी उम्मीद में कच्चे मकान की गिर रही दीवारों की तरह खंडहर बन जाते हैं लेकिन क्या मजाल सूनी आंखों में कोई ख्बाब तैर पाए। विकास खंड गगरेट के अंबोटा गांव में रह रहे बोल पाने में अक्षम एक बुजुर्ग दंपति का कच्चा मकान पिछली बरसात में जमीदोज हो गया, लेकिन इस दंपति को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत एक अदद मकान स्वीकृत नहीं हो पाया। जून माह में शरीर से प्राण खींच लेने वाली गर्मी के बीच ये दंपति एक टीन के शैड में जिंदगी बिताने को मजबूर है। टीन के शैड में रात को अगर आप लेटें तो शैड पर पड़ी टीन में इतने सुराख हैं कि आप कहां सितारे साफ देख सकते हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए जो पात्रता चाहिए वह सब है लेकिन फिर भी उसे मकान अलाट नहीं हो पा रहा है। ग्राम पंचायत अंबोटा के उपप्रधान संजीव रोमी का कहना है कि राम दित्ता को सरकारी आवास दिलाने के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत अनुमोदन किया गया है। जैसे ही स्वीकृति मिलती है इन्हें सूचित किया जाएगा।

शिव शक्ति सहयोग दल ने बढ़ाया मदद का हाथ

सरस्वती देवी की हालत देख कर बेशक सरकार के कर्णधारों का दिल न पसीजा हो लेकिन पीडि़त मानवता की सेवा के लिए तत्पर शिव शक्ति सहयोग दल ने इस बेसहारा दंपति की और मदद का हाथ बढ़ाया है। शिव शक्ति सहयोग दल की ओर से इस दंपति को सात हजार रुपए की नकद सहायता के साथ उसे राशन भी दिया गया।

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