चंबा के ग्रामीणों ने उगाए जंगल

गरोली-लड्डी गांवों के लोगों ने पेश की मिसाल कड़ी मेहनत से लहलहाए देवदार-बान के वन

शिमला –  चंबा के गरोली और लड्डी में देवदार की प्लांटेशन देखने पहुंचे एसीएस फोरेस्ट राम सुभग सिंह पीसीसीएफ अजय शर्मा व अन्य अधिकारी

शिमला  – ग्लोबल वार्मिंग की त्रास्दी झेल रही दुनिया के लिए चंबा जिला के दो गांवों ने अनूठी मिसाल पेश की है। जिला मुख्यालय से 18 किलोमीटर दूर गरोली तथा लड्डी गांव के ग्रामीणों ने देवदार तथा बान का 12 हेक्टेयर का जंगल तैयार कर दिया है। दोनों प्रजातियों की प्लांटेशन का सरवाइवल रेट औसतन 10 फीसदी है। बावजूद इसके लड्डी गांव के ग्रामीणों ने नौ हेक्टेयर के क्षेत्रफल में देवदार के 3643 पेड़ उगा दिए हैं। प्लांटेशन के बाद इनमें सिर्फ 46 पेड़ ही नष्ट हुए हैं। इसके चलते 99 फीसदी देवदारों की प्लांटेशन की सरवाइवल का यह पहला मामला है। लड्डी के इस जंगल के लिए मामुई, सामुई तथा कंज्याड़ उप गांवों के लोगों ने कड़ी मशक्कत की है। पुखरी के सटे इन गांवों के लोगों ने अब नौ हेक्टेयर का शानदार देवदार का जंगल तैयार कर लिया है। इसी तरह पहाड़ी पर स्थित गरोली गांव के लोगों ने तीन हेक्टेयर के क्षेत्रफल में बान तथा देवदार की प्लांटेशन कर 1651 हरे-भरे पेड़ों को खड़ा कर दिया है। इसके लिए गरोली के गलोटी, मनोग तथा मकंद उपगांवों के लोगों ने बेहतर प्रयास किए हैं।

प्लांटेशन देखने खुद पहुंचे अधिकारी

चंबा जिला के पुखरी क्षेत्र में हुई इस प्लांटेशन को देखने के लिए वन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव रामसुभग सिंह तथा पीसीसीएफ अजय शर्मा मौके पर पहुंचे। उन्होंने इस सफलता के लिए विभागीय अफसरों की पीठ थपथपाई और अनूठी पहल के लिए ग्रामीणों के हौंसले को सलाम ठोका। रामसुभग सिंह ने कहा कि बान तथा देवदार की प्लांटेशन की 99 प्रतिशत सरवाइवल ग्रामीणों के सहयोग से हुई है।

लोगों ने तारबंदी की, पहरा भी दिया

वन विभाग के सहयोग के लिए आगे आए इन ग्रामीणों ने दोनों जगह रोपित पौधों की तारबंदी के बाद अपने स्तर पर पहरा देना शुरू कर दिया। इन रकबों के भीतर किसी भी पशु के प्रवेश का प्रतिबंध ग्रामीणों ने लगा रखा है। सूखे के समय पौधों को रेन हार्वेस्टिंग सिस्टम से जोड़ कर सिंचित करना भी ग्रामीणों का दायित्व है। इन जंगलों में घास काटने के लिए ग्रामीणों ने कड़े नियम लागू कर रखे हैं। इसके तहत रोपित पौधों को नुकसान पहुंचाने वालों को भरी सभा में जवाबदेही का प्रावधान किया गया है।

पहले लैंटाना घास ने ढका था जंगल

प्लांटेशन से पहले यह इलाका लैंटाना के प्रभाव में था। इस कारण वन विभाग के अफसरों ने स्थानीय लोगों को जोड़ कर इस क्षेत्र से लैंटाना साफ करवाया और फिर देवदार और बान के पौधे रोपित किए। खास है कि प्लांटेशन एरिया से अब भी लैंटाना की सफाई स्थानीय ग्रामीण कर रहे हैं। वन विभाग और स्थानीय ग्रामीणों की इस जुगलबंदी से लोगों में पर्यावरण के प्रति अटूट आस्था जगी है।

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