चमकी बुखार का खौफ…नहीं बिक रही लीची

सोलन —बिहार में चमकी बुखार के कहर का खौफ प्रदेश में दिखने लगा है। माना जा रहा है कि लीची का अधिक सेवन करने से चमकी बुखार होता है। इसी बात से खौफजदा लोगों ने लीची खरीदना ही बंद कर दिया है। दूसरी ओर प्रदेश की मंडियों में लीची की आवक भी काफी कम हो गई है। इस बात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है अकेले इस बार फल एवं सब्जी मंडी सोलन में 60 प्रतिशत कम लीची पहुंची है और जो लीची पहुंची भी है उसका कोई खरीददार नहीं मिल रहा है। दुकानदारों ने भी लीची खरीदने से मुंह मोड़ लिया है। जानकारी के अनुसार वर्ष 2018-19 में 86 क्विंटल लीची सोलन मंडी पहंुची थी, लेकिन इस बार जून के तीसरे सप्ताह तक केवल 26 क्विंटल ही लीची सोलन पहुंची है। पिछले वर्ष इसका होलसेल रेट 30 से 90 रुपए प्रतिकिलो था, जबकि इस वर्ष इसका रेट 40 रुपए के आसपास ही रहा। शहर के दुकानदारों की बात करें तो उन्होंने अब लीची मंगवाना ही छोड़ दिया है। फल विक्रेता मोहम्मद रफी का कहना है कि पहले वह प्रतिदिन 50 से 60 किलो लीची बेचते थे। उस दौरान लीची का रेट 150 रुपए से अधिक होता था। बावजूद इसके लोग परवाह नहीं करते थे। उनका कहना है कि एक सप्ताह पूर्व तक चार से पांच किलो तक लीची बिक जाती थी पर अब हालत ऐसी है कि कोई डिमांड ही नहीं है। दूसरे फल विक्रेता मिंटू का कहना है कि बिहार में फैले चमकी बुखार के कारण लोग लीची खरीदने से परहेज कर रहे हंै। दिन में चार से पांच लोग लीची की डिमांड करते भी हैं, लेकिन अब हमने लीची मंगवाना ही बंद कर दिया है। इस बारे में प्रकाश कश्यप सचिव कृषि उपज एवं मंडी समिति  सोलन ने कहा कि लीची की डिमांड न के बराबर है। पिछले वर्ष के मुकाबले इस बार 60 प्रतिशत कम व्यापार हुआ है। वर्ष 2018-19 में 86 क्विंटल, जबकि इस वर्ष मात्र 26 क्विंटल ही लीची मंडी में पहुंची है।

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