चिडि़या बिना अधूरा रिवालसर का वन्यप्राणी विहार

 रिवालसर—विश्व प्रसिद्ध धार्मिक स्थान एवं प्रदेश का खूबसूरत पर्यटन स्थल रिवालसर स्थित करीब चार हेक्टेयर भूमि में फैला वन्यप्राणी विहार सरकार की अनदेखी के कारण पर्यटकों को आकर्षित नहीं कर पा रहा है। प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में देश-विदेश से यहां आने वाले पर्यटक वन्यप्राणी विहार को देखने आते हंै, लेकिन वन्यप्राणी विहार में केवल सामान्य छह प्रजातियों के जानवरों के अलावा उन्हें देखने के लिए विशेष प्रजाति के जानवर  देखने को नहीं मिलते हैं। वर्तमान में यहां केवल तीन नर काले भालू, 39 सांभर, दो नर चीतल, एक नर घोरल, आठ ककड़ तथा एक सैहल है। यहां रंग-बिरंगे पक्षियों के न होने से वन्यप्राणी विहार सूना लगता है। वहीं, रोहतक से घूमने आए पर्यटक सुरजीत सिंह, चंडीगढ़ के राजवीर तथा देहरादून से डा. नेहा शर्मा का कहना है कि वर्तमान में जानवरों को घूमने फिरने के लिए चार हेक्टेयर का क्षेत्र बहुत कम है।  उन्होंने इसे कम से कम 25 से 30 हेक्टेयर तक विस्तार करने के साथ यहां पेड़ लगाने व अन्य विशेष प्रजातियों के जानवर व पक्षियों के लिए विशेष बड़े शैड बनाने की बात कही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार  वन्यप्राणी विहार के विकास के प्रति  उदासीन रवैये के कारण यहां पर्याप्त स्टाफ भी नहीं जुटा पा रही है। डीएजी  संस्था के निदेशक नरेश शर्मा ने वन्यप्राणी विहार के क्षेत्र का विस्तार करने की मांग करते हुए सेंटर वाइड लाइफ संस्था से मांग कि है कि पर्यटन के दृष्टिकोण से देखते हुए वन्यप्राणी विहार को आधुनिक रंग देकर इसका विकास किया जाए। 

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