चीड़ की पत्तियों से तैयार होगा ईंधन

आईआईटी मंडी ने तैयार किया नया मॉडल, 25 यूनिट्स के लिए मंजूरी

शिमला – प्रदेश में चीड़ की पत्तियों पर आधारित स्थापित होने वाले लघु उद्योगों के लिए आईआईटी मंडी ने मॉडल तैयार कर दिया है। अब इसके आधार पर ही प्रदेश सरकार ने 25 उद्योग स्थापित करने के लिए मंजूरी प्रदान कर दी है। ये उद्योग प्रदेश के कुल्लू, मंडी, शिमला, कांगड़ा, हमीरपुर, सोलन और बिलासपुर क्षेत्रों में लगाए जाएंगे। चीड़ की पत्तियों पर आधारित औद्योगिक इकाइयां लगाने के लिए सरकार निवेशकों को 50 प्रतिशत की ग्रांट देगी। ग्रांट का यह पैसा निवेशकों को एक साथ न देकर तीन किस्तों में दिया जाएगा। पहली किस्त में निवेशक को यूनिट लगाने के लिए आधारभूत ढांचे का विकास करना होगा। दूसरी किस्त उपकरण लगाने के लिए प्रदान की जाएगी। निवेशक को तीसरी किस्त काम काम शुरू होने के बाद दी जाएगी, ताकि निवेशक पैसों का दुरुपयोग ने कर सकें। उद्योग स्थापित करने के लिए आवेदन मांग लिए गए है। चीड़ के जंगलों की आग पर काबू पाने के लिए और गांव के छोटे निवेशकों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ने चीड़ की पत्तियोंं के उद्योग को बढ़ावा दिया है। एक यूनिट स्थापित करने के लिए पांच से छह लाख रुपए तक का खर्चा आएगा। इस पर सरकार निवेशकों को 50 प्रतिशत तक का उपदान देगी। यह इकाई गांव का एक छोटा निवेशक आसानी से स्थापित कर सकता है। इसमें वन विभाग संबंधित क्षेत्र में एरिया चयनित करेगा। लोगों को उसी क्षेत्र से चीड़ की पत्तियां इकट्ठी करनी होंगी और उससे इंधन तैयार करना होगा। चीड़ की ये पत्तियां फायर सीजन के दौरान लोगों को फ्री में दी जाएंगी। इसके बाद ऑफ  सीजन में ये लोगों को दाम देकर उपलब्ध करवाई जाएंगी।

आसानी से लग सकती है यूनिट

चीड़ की पत्तियों पर आधारित उद्योग के लिए लोग अपनी खाली जमीन में यह यूनिट आसानी से स्थापित कर सकते हैं। इसमें उच्च दाब से चीड़ की पत्तियों से ईंधन तैयार किया जाता है, जो सिमेंट, बॉयलर जैसे बड़े उद्योगों के लिए ईंधन की मांग पूरा करेगा। सरकार की पॉलिसी में इन उद्योगों को चीड़ की पत्तियों से तैयार किए गए एक प्रतिशत ईंधन को उपयोग में लाना अनिवार्य किया गया है।

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