चुवाड़ी में आग…90 किलोमीटर दूर से आती है फायर ब्रिगेड

चुवाड़ी —मुख्यालय में आगजनी जैसी घटनाओं से निपटने के लिए 90 किलोमीटर से राहत आने के लिए घटों का लंबा इंतजार। जी हां! चुवाड़ी तक चंबा से फायर ब्रिगेड की गाड़ी को 90 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है, ऐसे में इतनी दूरी तय करने में काफी वक्त लग जाता है। कई बार तो कुेछ हाथ नहीं लगता । खास यह भी कि चुवाड़ी केंद्र बिंदु है, ऐसे में चुवाड़ी में फायर ब्रिगेड सेंटर काफी महत्त्वपूर्ण रोल अदा कर सकता है। गौर रहे कि चंबा जिला के भटियात में आग सबसे ज्यादा कहर बरपाती है। गर्मियों के सीजन में यहां जंगल खूब सुलगते हैं। वहीं साल भर कहीं न कहीं आग कहर बरपाती है। हिमालय बचाओ समिति ने इस संदर्भ में पहले ही मुख्यमंत्री को भी चिट्टी भेजी है, जिस पर अभी तक कार्रवाई नहीं हुई है। यही नहीं समिति ने पशुपालन मंत्री, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, मुख्य सचिव, प्रधान अरण्यपाल और वन मंडल अधिकारी डलहौजी से भी पत्राचार किया है। समिति का तर्क है कि अगर चुवाड़ी में फायर ब्रिगेड सेंटर होताएतो घटित  कई भीषण अग्निकांड को रोका जा सकता था। यही नहीं बीती गर्मियों के सीजन में भी कुछ लोग आग की भेंट चढ़ चुके हैं।  इस क्षेत्र में दो मंजिला मकान जलकर राख हो गया था। मौजूदा समय में अगर इस इलाके में आग लगती है तो चंबा से गाड़ी ने भटियात का सफर तय करना होता है। चंबा से अगर गाड़ी वाया डलहौजी आती हैएतो यह दूरी 90 किलोमीटर पड़ती है। वहीं वाया जोत यह सफर 55 किलोमीटर बनता है। दोनों ही स्थितियों में यह दूरी बेहद ज्यादा है। गर्मियों के सीजन में यहां जंगल खूब सुलगते हैं। वहीं साल भर कहीं न कहीं आग कहर बरपाती है। हिमालय बचाओ समिति ने इस संदर्भ में पहले ही मुख्यमंत्री को भी चिट्टी भेजी है जिस पर अभी तक कार्रवाई नहीं हुई है। यही नहीं, समिति ने पशुपालन मंत्री प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, मुख्य सचिव, प्रधान अरण्यपाल और वन मंडल अधिकारी डलहौजी से भी पत्राचार किया है। समिति का तर्क है कि अगर चुवाड़ी में फायर ब्रिगेड सेंटर होता, तो घटित कई भीषण अग्निकांड को रोका जा सकता था। यही नहीं बीती गर्मियों के सीजन में भी कुछ लोग आग की भेंट चढ़ चुके हैं। इस क्षेत्र में दो मंजिला मकान जलकर राख हो गया था। मौजूदा समय में अगर इस इलाके में आग लगती है, तो चंबा से गाड़ी ने भटियात का सफर तय करना होता है। चंबा से अगर गाड़ी वाया डलहौजी आती है तो यह दूरी 90 किलोमीटर पड़ती है। वहीं , वाया जोत यह सफेर 55 किलोमीटर बनता है। दोनों ही स्थितियों में यह दूरी बेहद ज्यादा है। ऐसे में अगर इस इलाके को आग से बचाना हैएतो चुवाड़ी में फायर ब्रिगेड सेंटर का खुलना जरूरी है। समिति के सदस्य उत्तम चंद कौशल का कहना है कि चुवाड़ी में अगर फायर ब्रिगेड केंद्र खुला, तो यह मील का पत्थर साबित होगा। इससे से सिहुंता, ककीरा, मनहूता, रायपुर, बकलोह और जोत आदि इलाके आसानी से कवर हो जाएंगे।

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