चेन्नई तो बस शुरुआत, दिल्ली समेत कई बड़े शहरों में भी आएगा जल संकट, पड़ेगा सूखा

भोपाल में भी दिख रहा जल संकट (फोटो-शेखर घोष)‘जल ही जीवन है’ इस कहावत को हम सभी ने कई बार सुना तो जरूर होगा, लेकिन इसे कभी गंभीरता से नहीं लिया होगा. अब लोग चेन्नईवासियों से पानी की अहमियत के बारे में पता करें तो मालूम होगा कि उन्हें इन दिनों पानी के लिए किस कदर संघर्ष करना पड़ रहा है. अभी सिर्फ चेन्नई ही जल संकट से जूझ रहा है, लेकिन देश में जिस तरह के हालात हैं और जलाशय, पोखरे और नदियां सूखती जा रही हैं, उससे तो यही लगता है कि कई अन्य शहर भी जल्द ही सूखे और प्यास की चपेट में आ जाएंगे.

जल संकट भारत की अहम समस्याओं में से एक है और यहां पर स्थिति बेहद खतरनाक स्तर पर जाती दिख रही है. यह लगातार दूसरा साल है जब देश में मॉनसून कमजोर रहा और इस कारण देश की आबादी के एक-तिहाई हिस्से यानी 33 करोड़ लोगों को जल संकट का सामना करना पड़ा. बारिश में लगातार आ रही गिरावट के कारण दक्षिणी और पश्चिमी राज्यों में जल की स्थिति खराब होती जा रही है. देश में सूखे का संकट गहराता जा रहा है. आईआईटी गांधीनगर की ओर से जारी चेतावनी में कहा गया कि देश के 40 फीसदी क्षेत्रों में सूखे का संकट बना हुआ है.

21 बड़े शहरों पर जल संकट का खतरा

पिछले साल नीति आयोग की ओर से जारी की गई कंपोजिट वाटर मैनेजमेंट इंडेक्स (सीडब्ल्यूएमआई) के अनुसार 2020 तक देश के 21 बड़े शहरों (दिल्ली, बेंगलुरू, चेन्नई और हैदराबाद प्रमुख शहर) में ग्राउंडवाटर जीरो लेवल तक पहुंच जाएगा, जिससे यहां की 10 करोड़ से ज्यादा की आबादी जल संकट का सामना करेगी. आज की तारीख में देश की करीब 12 फीसदी आबादी गंभीर जल संकट का सामना कर रही है.

खराब जल संरक्षण ने बिगाड़ी स्थिति

ताबड़तोड़ ग्राउंड वाटर पंपिंग, जल संरक्षण की बेहद खराब व्यवस्था और अनियमित बारिश ने हालात को और खराब कर दिया है. सीडब्ल्यूएमआई की रिपोर्ट कहती है कि 2030 तक देश में पानी की मांग दोगुनी हो जाएगी और इस कारण करोड़ों लोगों को पानी की कमी का सामना करना पड़ेगा. इससे देश की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 6 फीसदी का नुकसान होगा.

इसके अलावा अंधाधुंध विकास कार्य और बेहिसाब तरीके से किए जा रहे निर्माण कार्यों ने भी कई शहरों के जलस्तर को काफी नीचे तक पहुंचा दिया है. विकास की दौड़ में हम पेड़ और जंगल खत्म करते जा रहे हैं तो पानी संरक्षण के बेहतर विकल्पों कुंओं, तालाब और पोखरों को खत्म कर जमीन बनाकर वहां इमारतें खड़ी की जा रही हैं, जिन्होंने जल संकट को और गहरा किया है.

कामयाब होगी 2024 की योजना!

केंद्र में नरेंद्र मोदी की अगुवाई में एनडीए सरकार ने अपना दूसरा कार्यकाल इसी जल संकट के बीच शुरू किया है. नई सरकार ने जल शक्ति नाम से नया जल मंत्रालय बनाया है. मंत्रालय की अहम जिम्मेदारी देश में जल संकट को कम करने की है और उसने ऐलान किया है कि मंत्रालय ने 2024 तक भारत में हर घर में पाइप के जरिए पानी का कनेक्शन देने की योजना बनाई है. लेकिन जिस तरह से जल संकट बना हुआ है और पीने वाले जल सूखते जा रहे हैं. ऐसे में सरकार जब तक पानी का संरक्षण नहीं करती तब तक ऐसे किसी लक्ष्य को हासिल कर पाना असंभव ही है.

बड़े शहरों को ज्यादा तवज्जो

अंधाधुंध विकास के चक्कर में हम जल से ज्यादा जमीन को तवज्जो दे रहे हैं और यह हालत स्थानीय नगर निकायों की है. भारतीय शहरों में जल वितरण की स्थिति असामान्य है क्योंकि राजधानी दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों को ज्यादा पानी दिया जा रहा है जबकि अन्य क्षेत्रों के लोगों को कम पानी मिलता है. डाउनटूअर्थ डॉट ओआरजी डॉट इन के मुताबिक बड़े शहरों में 150 लीटर पानी प्रति दिन प्रति व्यक्ति (एलपीसीडी) के हिसाब से दिया जाता है जबकि अन्य क्षेत्रों में 40 से 50 लीटर एलपीसीडी पानी दिया जाता है.

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