जंजैहली में जुटेंगे देश के ट्रैवल एजेंट

थुनाग –सराज के पर्यटन को अब पंख लगने वाले हैं। अब तक अनछुए रहे सराज को पर्यटन विभाग व जिला प्रशासन ने क्षेत्र के अत्यंत रमणीक स्थलों को चिन्हित कर उनको पर्यटन के नक्शे पर लाने की कवायद शुरू कर दी है। क्षेत्र में पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए 11 से 14 जुलाई को जंजैहली के ढीम कटारू में टूरिज्म फेस्टिवल का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें देशभर से चुनिंदा ट्रैवल एजेंट्स को बुलाया जाएगा। सरकार के आदेश पर पर्यटन विभाग और जिला प्रशसन ने सराज के शिकारी देवी,  भुलाह,  मगरू महादेव,  तुंगासीगढ,  शैटाधार,  सपैहणीधार,  चुंजवालाधार,  कमैडाधार,  गरहलसह,  देव कांढा,  खाउली,  गाडागुशैणी और घाटीहाड जैसे पर्यटन  स्थलों को विकसित करने के लिए विस्तृत योजना बनाई गई है। इन अनछुए दार्शनिक स्थलों के विकसित होने से सराज पर्यटन  के विश्व मानचित्र पर उभरेगा। सराज के शिकारी देवी, भुलाह, तुंगासीगढ, कमेडाधार, सपैहणीधार में प्राकृतिक स्कीइंग ढलानें हैं। स्थानीय प्रशासन ने बर्फबारी के बाद अटल बिहारी वाजपेयी पर्वतारोहण संस्थान मनाली के सौजन्य से भुलाह व शिकारी में स्कीइंग के सफल कैंप का आयोजन भी किया था। इस कैंप में स्थानीय युवाओं को स्कीइंग के गुर भी सिखाए गए। कमेडाधार में पैराग्लाइडिंग की  साइट भी है। यूं तो समूचा सराज क्षेत्र दिलकश प्राकृतिक छटा से सराबोर है लेकिन ट्रैकिंग के लिए शिकारी देवी, रायगढ, मगरूगला, तुंगासीगढ, माधोपुर, शैटाधार, सपैहणीधार, चुंजवाला, घाटीहाड, गरहलसह, कमैडाधार, देव कांढा, नरायणगढ और खाउसी सबसे बेहतर रूट हैं। यह सभी छोटी-बड़ी पर्वतमालाएं एक दूसरे से सटी हुई हैं और इन्हें जोड़ने के लिए प्राकृतिक तौर पर चरवाहों ने पहले से ही रास्ते बना रखे हंै। उपमंडल अधिकारी थुनाग सुरेंद्र मोहन ने बताया कि सराज में पर्यटन को बढ़ावा देने  को 11 से 14 जुलाई तक ढीम कटारू में पर्यटन महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है।

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