जठेंजो मेले में उमड़ा आस्था का सैलाब

मतियाना—जिला शिमला की प्रसिद्ध देवठी मां माहेश्वरी देवी शड़ी मतियाना के रोणी घाटी मंदिर परिसर में हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी जठेंजो मेला धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर मतियाना परगना सहित बाहरी क्षेत्रों से आए हजारों श्रद्धालुओं ने माता के दर्शन कर मन की मुरादे मांगी। जठेंजो मेला हर वर्ष जेठ मास की नाग पंचमी को मनाया जाता है। मां माहेश्वरी अपने स्थायी मंदिर शड़ी से सुबह ढोल नगाड़ों, कडनालो तथा शहनाई के दैविक सुरों की ताल पर अपने कार करिंदों के साथ समुद्रतल से लगभग 3300 मीटर की ऊंचाई पर स्थित नाग टिंबा के लिए प्रस्थान करती है। माता के पुजारियों द्वारा नाग टिबे पर इलाके की सुख समृद्धि के लिए माता की पूजा-अर्चना की जाती है। उसके बाद रोणी घाटी में भव्य जातर का आयोजन किया जाता है जिसमें भारी संख्या में श्रद्धालु आकर माता का आशीर्वाद प्राप्त करते है। शुक्रवार को आयोजित जठेजो मेले में माता ने अपने गूर के माध्यम से कारदारों व कल्याणों को सुख समृद्वी व खुशहाली का आशीर्वाद भी प्रदान किया। मां माहेश्वरी देवी जी शडी के देंवा नरायण दत शर्मा, पुजारी केशव राम शर्मा, कारदार उदीराम शर्मा, विद्यादत, उमादत, मोहनलाल, नरायण दत, तुलसीराम, दिलाराम, भंडारी मस्तराम केवला, माहेश्वरी देवी ट्रस्ट शडी उपाध्यक्ष अधिवक्ता मदन चौहान, ठगडा रंजीत ठाकुर, ज्ञान ठाकुर, माठु राम कुंदन चौहान, नायब भंडारी कृष्ण लाल, खजांची दुर्गा सिह ठाकुर, सचिव नरेंद्र चंदेल, प्रधान हिरा सिंह, कमेटी सदस्य सहित माता के सभी कार करीदंे व कल्याणे इस अवसर पर उपस्थित रहें।

नाग टिंबा पर माता ने किया था बाणासुर का वध

स्थानीय बुजुर्गो के अनुसार पहले जठेंजो मेला मतियाना के समीप नागजुब्बड़ स्थान पर मनाया जाता था। ऊपरी क्षेत्र में राक्षस का आतंक बढ़ने के कारण कारदारों व कल्याणों की विनती पर क्षेत्रवासियों की रक्षा के लिए मां माहेश्वरी ने नाग टिंबे पर जाकर बाणासुर (बणशीरा) नामक राक्षस का वध किया था जिसने क्षेत्र वासियों पर अत्याचार किए थे। उसके बाद से लगातार हर वर्ष माता अपने कार करिदों के साथ नाग ंिटबा जाती हेै जंहा पर क्षेत्र की सुख समृद्वि के लिये माता की पूजा अर्चना की जाती है। मतियाना परगना के लोग आज भी इस प्रथा खुशी से चला रहे है।

सिड्डू घी चढ़ाने की परंपरा आज भी जारी

जठेंजो मेले के लिये पूरे मतियाना परगने में विशेष रूप से माता के भोग के लिये सिड्डू बनाए जाते हैं। हर घर से सिड्डू व घी लेकर माता के कल्याण नाग टिंबा पंहुचते है। भोग लगाने के बाद वहां पर आये सभी लोगों को सिडडू व घी खिलाया जाता है। ये मेला सिडडू व घी के मेले के नाम से भी प्रसिद्व है।

मेले में टिक्कर में लगा भक्तों का तांता

खंड मतियाना की ग्राम पंचायत धार कंदरू के अराध्य देव श्री कालु नाग देवता महाराज जठेंजो मेले के समापन के बाद अपने मूल स्थान धार कंदरू वापस लौटे। मेले के लिए देवता महाराज पहले दिन अपने कार करिदों के साथ टिकर ंिटबा के लिए प्रस्थान करते है और रात्री को टिकर मे बने काली  माता मदिर में ही रूकते है जहां पर क्षेत्रवासियों द्वारा सुख समृद्वि व खुशहाली के लिये देवता महाराज की पूजा अर्चना की जाती है। कहा जाता है कि टिकर श्री कालु नाग देवता की तपोस्थली है जहां पर उन्होंने तप किया था। जठेजो मेले के लिए श्री कालु नाग देवता जदूण भी टिकर आते है और दूसरे दिन गडाहकुफर में मेला लगता है जहां पर सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित होते है। कालु नाग देवता धार कंदरू के गूर देवा किशोरी लाल तथा मंदिर कमेटी के प्रधान कंवर इंद्र सिंह ठाकुर ने बताया कि हर वर्ष कंदरू मे जठेंजो मेले को बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। मेले में बड़ी संख्या में लोग देवता महाराज के साथ काली माता मदिंर टिकर जाते है वहां पर विधि विधान से पूजा अर्चना की जाती है और महाराज से सुख समृद्वि का आशीष ली जाती है।

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