जिंदगी की जंग हार गया फतेहवीर

109 घंटे बाद बोरवेल से बाहर निकाला मासूम, मौत से गुस्साए ग्रामीण

चंडीगढ़ – संगरूर जिला के सुनाम के नजदीकी गांव भगवानपुरा में 140 फीट गहरे बोरवेल में गिरे दो वर्षीय बच्चे फतेहवीर सिंह को नहीं बचाया जा सका। उसे मंगलवार सुबह करीब सवा पांच बजे 109 घंटे के बाद बोरवेल से निकाल तो लिया गया, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। बच्चे को बोरवेल से निकालने के बाद तुरंत एंबुलेंस से डीएमसी अस्पताल ले जाया गया। वहां से उसे चंडीगढ़ पीजीआई रेफर कर दिया गया। पीजीआई में बच्चे को मृत घोषित कर दिया गया। इसके बाद शव को हेलिकॉप्टर से सुनाम लाया गया, जहां गांव के शमशानघाट में उसका अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम क्रिया दौरान भारी गिनती में लोग उमड़े। पीजीआई में अकाली नेता परमिंदर सिंह ढी़ंढसा सहित कई नेता भी पहुंचे। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने बच्चे की मौत पर दुख व्यक्त किया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक फतेहवीर की मौत कुछ दिन पहले ही हो गई थी। पीजीआई की ओर से जारी रिपोर्ट में बताया गया है कि जब बच्चे को लाया गया उसकी नाड़ी नहीं चल रही थी। हार्ट में कोई गतिविधि नहीं थी।

चीमा वापस जाओ के लगे नारे

पीजीआइर् में शिरोमणि अकाली दल के नेता परमिंदर सिंह ढींढसा सहित कई नेता पहुंचे। आम आदमी पार्टी के नेता हरपाल चीमा भी वहां पहुंचे। उनका लोगों ने काफी विरोध किया और वहां से जाने को कहा। लोगों ने चीमा के खिलाफ नारेबाजी की और चीमा से पूछा कि  पिछले पांच दिनों से तो नजर नहीं आए और अब राजनीति चमकाने आ गए। लोगों ने चीमा वापस जाओ के नारे लगाए। उधर, लोगों का प्रशासन और पंजाब सरकार पर गुस्सा फूट पड़ा है। गांव और संगरूर में भी लोग प्रदर्शन कर रहे हैं और धरना दे रहे हैं। लोगों का आरोप है कि प्रशासन और सरकार की लापरवाही के कारण बच्चे को समय पर नहीं निकाला जा सका और उसकी जान चली गई।

 

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