जोगेश्वर महादेव मंदिर दलाश

प्रारंभ में यहां द्वादश शिवलिंग स्थापित किए गए थे, जिनके अवशेष यहां आज भी विद्यमान हैं। यहां द्वादश शिवलिंग की स्थापना होने पर यहां का नाम आदिकाल से ही द्वादश या फिर स्थानीय बोली में द्वाश या फिर दलाश के नाम से प्रसिद्ध है…

मनोरम पहाडि़यों में बसा कुल्लू का दलाश गांव सतलुज घाटी ब्राह्य सिराज के प्रवेशद्वार लुहरी से मात्र 28 किमी. दूर समुद्रतल से लगभग 6000 फुट की ऊंचाई पर बसा है। यहां भगवान शिव का अति प्राचीन मंदिर स्थापित है, जो जोगेश्वर महादेव के नाम से विख्यात है। कहा जाता है कि यहां भगवान शिव के लिंग रूप की स्थापना त्रेतायुग के समय में ऋषियों द्वारा की गई है। प्रारंभ में यहां द्वादश शिवलिंग स्थापित किए गए थे, जिनके अवशेष यहां आज भी विद्यमान हैं। यहां द्वादश शिवलिंग की स्थापना होने पर यहां का नाम आदिकाल से ही द्वादश या फिर स्थानीय बोली में द्वाश या फिर दलाश के नाम से प्रसिद्ध है। प्राचीन समय में यहां कोई बड़ा मंदिर नहीं था, बल्कि शिवलिंग को बाहर से पत्थरों द्वारा स्तंभाकार स्थिति में ढंक कर स्थापित किया गया। इसके सम्मुख नंदी बैल की पत्थर की पूर्वाविमुख प्रतिमा स्थपित है। सहस्राब्दियों से जोगेश्वर महादेव की पूजा अखंडशः होती गई। वृत्तांत आता है कि दलाश के सामने की नौनू हिमरी की पहाड़ी के आगे हिमरी खड्ड बहती है। जहां कुईकंडा नामक स्थान पर नाग देवता का अति प्राचीन मंदिर है। अचानक हिमरी खड्ड में बाढ़ आने से मखौटा बाढ़ में बहता गया, जो नीचे जाकर क्षेत्र के रठोह गांव में एक किसान के खेत में पहुंच गया। किसान ने अपने खेत में जैसे ही हल चलाया तो हल की नोक से मखौटा बाहर आ गया । किसान हैरान हुआ और देव मखौटे को साफ कर अपने घर गंच्छवा ले गया। काफी दिनों तक किसान मूर्ति की भक्ति भाव से पूजा-अर्चना करने लगा। इस बीच किसान के साथ कई चमत्कार भी हुए। एक दिन विशेष त्योहार के दिन किसान को खेल आई और गांव वालों को देववाणी के माध्यम से कहा कि वो स्वयं शिव है। उनके लिए मंदिर बनाएं ताकि वो वहां आदिकाल तक वास कर सकें। उन्होंने कहा कि इस स्थान से चींटियों की पंक्ति निकलेगी और जिस स्थान पर वो रुककर अपना बिल बनाएगी, तो उसी स्थल पर मेरा निवास स्थान होगा। देववाणी के अनुसार वहां से चींटियां निकली और दलाश में स्थित जोगेशश्वर महादेव तक जा रुकी। जहां क्षेत्र के लोगों ने अपनी आस्था का परिचय देते हुए सतलुज शैली में एक भव्य मंदिर का निर्माण किया। तब से देवता जोगेशश्वर महादेव लिंग रूप के साथ-साथ मूर्ति रूप से भी विख्यात है। दलाश देवता सिरिगढ़ क्षेत्र का प्रमुख देवता है। खुली आंख वाली ऐसी अद्भुत मूर्ति दूसरी जगह कहीं भी नहीं देखी जाती। त्योहारों एवं उत्सवों में देवता रथ पर विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देते हैं। दलाश के अलावा डिंगीधार, बयूंगल, पलेही, कुठेड़, जाबन, नमहोंग और तलुणा के लोग भी देवता को अधिष्ठाता मानते हैं ।

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