झूठ बोलना

सद्गुरु जग्गी वासुदेव

पिछले कुछ सालों से मैं एक चीज गौर कर रहा हूं कि ईशा योग केंद्र आने के उत्साह में कुछ लोग दुर्भाग्य से झूठ बोल कर आ रहे हैं। अपने घरवालों या बॉस से झूठ बोल कर यहां आ रहे हैं यानी आश्रम में आने के लिए झूठ का सहारा ले रहे हैं। यह रोजमर्रा के जीवन में लोगों द्वारा बोले जाने वाले तमाम झूठों में से एक उदाहरण है, जो वे अपने घरवालों, जीवन साथी या बॉस या अपने आसपास के लोगों से बोलते रहते हैं। अगर आप झूठ को अपने जीवन का एक हिस्सा बना लेते हैं, तो रिश्ते को खूबसूरत और सद्भावपूर्ण रख पाना मुश्किल होता है। किसी भी रिश्ते के लिए महत्त्वपूर्ण है कि उसमें से झूठ को बाहर कर दिया जाए। केवल तभी आप एक खूबसूरत रिश्ता रख सकते हैं। यहां तक कि अगर आप एक बार भी झूठ बोलते हैं, तो फिर सामने वाला आपकी बोली हुई हर बात को शक की नजर से देखेगा। लोग अकसर झूठ इसलिए बोलते हैं कि उनमें सच बोलने से पैदा होने वाली अप्रिय स्थिति का सामना करने का साहस नहीं होता। अगर कुछ सोच-विचार के बाद आप कुछ करने के बारे में तय करते हैं और आपके आसपास के लोग इसका विरोध कर रहे हैं, तो आप दृढ़ता से कहें कि आप यह करने जा रहे हैं। अगर आप सच बोलेंगे तो हो सकता है कि आपस में कुछ कटुता या टकराव हो, लेकिन फिर भी आपके रिश्ते में एक लिहाज और सम्मान रहेगा। लेकिन जब आप अप्रिय प्रतिक्रियाओं या टकराव से बचने के लिए झूठ का सहारा लेते हैं, तो यह रिश्तों को बर्बाद कर देता है क्योंकि तब सामने वाले को पता ही नहीं चल पाता कि आप जो कह रहे हैं, वो सच है या झूठ। सामने वाले के भीतर आपकी बातों को लेकर एक अंतहीन संघर्ष शुरू हो जाता है और वही संघर्ष फिर आपके रिश्तों में आ जाता है। इसलिए सच बता दीजिए। जो चीज आपके लिए मायने रखती है, उसके लिए खड़ा होना महत्त्वपूर्ण है खासकर बात जब योग की आती है तो यह और महत्त्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि यह चीज आप अपने कल्याण के लिए कर रहे हैं। खुद के लिए खड़े होना आपके लिए, आपके रिश्तों के लिए और योग के लिए भी अच्छा है। हो सकता है कि शुरू में लोग आपसे नाराज रहें, लेकिन कुछ समय बाद सब ठीक हो जाएगा। यह जीवन जीने का सबसे समझदारी भरा और प्रभावशाली तरीका है।

 

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