टावरों की रेडिएशन से विलुप्त हो रही पक्षियों की प्रजातियां

परवाणू—परवाणू क्षेत्र में मोबाइल टावरों की बढ़ती संख्या दे रही खतरनाक बीमारियों को बढ़ावा। मोबाइल टावरों से निकलने वाली तरंगों से पक्षियों की प्रजातियां हो रही लुप्त। ज्ञात हो कि मोबाइल टावरों को लगाने संबंधी जारी निर्देश ज्यादातर कंपनियां नजर अंदाज कर रही है। भीड़भाड़ वाले स्थानों में मोबाइल टावर लगाए जा रहे है, प्रशासन द्वारा अपनाई जा रही सुस्त कार्रवाई का टावर कंपनियां धड़ल्ले से लाभ उठा रही है। जिसका अनुमान शहर ओर साथ लगते गांव के बीचोंबीच बढ़ रही टावरों की संख्या से लगाया जा सकता है। कई जगह दो-दो टावर मकानों के नजदीक लगा दिए है। जिसके कारण टावरों की रेडिएशन के कारण चिडि़या, मनुष्य के दोस्त पक्षी प्रजातियां खत्म हो रही है। इस बारे टावरों लगाने वाली कंपनी के अधिकारी ने नाम न छपने की शर्त पर बताया की  मोबाइल टावर हर तरह की अनापति प्रमाणपत्र लेने के उपरांत ही लगाया जाता है फिर भी यदि जहां लोग आपत्ति जताते है वहां से टावर अन्य जगह तब्दील कर दिया जाता है। इस संबंध में डाक्टरों का कहना है कि मोबाइल टावरों के रेडिशन से कई तरह की भयानक बीमारियों के वजूद से इनकार नहीं किया जा सकता है। टावरों की रेडिएशन तरंगों से फेंफड़ों के कमजोर होने नीद ना आना तनाव सिर दर्द, बेचैनी, आंखों की रोशनी कम होने के साथ-साथ कैंसर रोग पनपने की संभावना बन जाती है। इस मामले में अहम बात यह है कि टावर से निकलने वाली किरणों के प्रभाव से स्वास्थ्य प्रभावित होता है। यह बात टावर लगवाने वाले लोग भी जानते है फिर भी वह अपनी जान जोखिम में डाल रहे है।

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