ठुंडू बिरादरी के शांत महायज्ञ में चौपाल पहुंचे सैकड़ों श्रद्धालु

नाहन—जिला सिरमौर के पांवटा व शिलाई तहसील के करीब आधा दर्जन गांव के सैकड़ों लोग जिला शिमला के चौपाल क्षेत्र के गांव ठुंडना में 12 वर्ष बाद आयोजित माता ठारी के मंदिर में शांत महायज्ञ में पहुंचे। इस महायज्ञ में हजारों की संख्या में जिला शिमला व सिरमौर के श्रद्धालु एक साथ शीश नवाने पहुंचे तथा जमकर सिरमौरी व शिमला जिला के पारंपरिक वाद्य यंत्रों व लोक गीतों पर थिरके। ठुंडू बिरादरी के हजारों लोग सिरमौर, शिमला, सोलन व उत्तराखंड के जौंसार बाबर क्षेत्र से इस शांत महायज्ञ में पहुंचे हुए थे। सिरमौर जिला के पांवटा तहसील के आंजभौज क्षेत्र के गांव भरली व बनौर, पौका, मिनल बाग, भटाड़, जूईनल, बांदली, कांठी सुंदराड़ी, दाया, चुणकोली, टिंबा, चचराड़ा, बालीकोटी, संगताड़ी, ढेलवाना, दिऊड़ी खड़ाहं, ठुंडाड़ी के अलावा जिला शिमला की तहसील चौपाल व उत्तराखंड के चकराता क्षेत्र के सैकड़ों ठुंडू बिरादरी के लोगों ने इस शांत महायज्ञ में भाग लिया। जानकारी के मुताबिक यह महायज्ञ समाज में शांति व कल्याण के लिए आयोजित किया जाता है तथा 12 वर्ष बाद यह शांत महायज्ञ चौपाल के ठुंडना गांव में स्थित माता ठारी के मंदिर में किया गया। ठुंडुओं के पुश्तैनी गांव ठुंडना में आयोजित होने वाला यह शांत महायज्ञ तीन दिनों तक चलेगा। इस शांत महायज्ञ में शिमला जिला के 30 गांव, शिलाई क्षेत्र के 20, पांवटा क्षेत्र के पांच, राजगढ़ क्षेत्र के तीन व शिमला जिला के कुसुम्टी क्षेत्र केे चार गांव के हजारों लोग शामिल हो रहे हैं। जानकारी के मुताबिक इस शांत महायज्ञ में ठुंडू बिरादरी के अलावा अन्य लोग भाग नहीं ले सकते हैं। इस महायज्ञ की खासियत यह है कि इस दौरान गांव में किसी अन्य बिरादरी के लोगों को आने की अनुमति नहीं होती है। इस दौरान बिरादरी के लोग पुश्तैनी अस्त्र-शस्त्र का प्रदर्शन करते हैं, जिसमें मुख्य रूप से तलवार, डांगरा व अन्य स्थानय शस्त्र शामिल हैं। शांत महायज्ञ के दौरान धार्मिक अनुष्ठान व देवी अराधना विशेष रूप से तीन दिनों तक लगातार चलेगी।

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