डा. मिश्रा ने मस्तिष्क आघात से चेताए लोग

चंडीगढ़ -मोहली स्थित शैल्बी मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल के डीएम न्यूरोलॉजी डाक्टर संजय मिश्रा ने स्ट्रोक यानि मस्तिष्क आघात को मौजूदा समय की बड़ी बीमारी बताते हुए लोगों को अपने स्वास्थ्य के संबंध में सावधान रहने की सलाह दी है। डाक्टर मिश्रा के अनुसार स्ट्रोक ऐसी स्वास्थ्य संबंधी स्थिति है, जिसमें दिमाग तक खून पहुंचने में रुकावट के कारण कोशिकाओं की मौत हो जाती है। स्ट्रोक या मस्तिष्क आघात दो प्रकार के होते हैं, एक दिमाग तक कम खून पहुंचने के कारण और दूसरा रक्तस्त्राव के कारण। इसके परिणाम स्वरूप दिमाग ठीक से काम नहीं कर पाता। इसके लक्षणों में शरीर के एक भाग का काम न करना या इसे हिला या महसूस न कर पाना, समझने या बोलने में दिक्कत, ब्राह्मंड घूमते हुए महसूस होना या एक ओर की दृष्टि खो जाना शामिल हैं। मस्तिष्क आघात भारत में अपंगता या मौत का बड़ा कारण है। एक अनुमान के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में प्रति एक लाख व्यक्तियों में 84 से 262 को और शहरी इलाकों में 334 से 424 लोगों का इससे सामना होता है। वर्ष, 1998 से 2004 तक इससे मौत की दर 7.8 प्रतिशत बढ़ चुकी है। पिछले डेढ़ दशक में भारत में मस्तिष्क आघात के मामलों में 17.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इसके लक्षणों में विशेष तौर पर शरीर का एक हिस्सा कमजोर या सुन्न होना, बेहोश होना, एक या दोनों आंखों की रोशनी घटना, बोलने या लिखने में परेशानी, चलने में परेशानी या संतुलन खोनाख् भम्र या याद्दाश्त खो देना और निगलने में परेशानी आदि सम्मिलित हैं। मस्तिष्काघात एक चिकित्सीय आपातकाल है और मरीज को तुरंत सीटी/एमआरआई सुविधा वाले नजदीकी अस्पताल पहुंचाना चाहिए। ऐसा इसलिए, क्योंकि मरीज को जल्द से जल्द विशेष उपचार की आवश्यकता होती है। उपचार के बाद भी रोगी को रिहेबिलिटेशन नर्सिंग, फिजिकल थैरेपी, ऑक्यूपेशनल थैरेपी, स्पीच लेंग्वेज पैथोलॉजी, ऑडियोलॉजी, रिक्रिएशनल थैरेपी, न्यूट्रीशनल केयर, रिहेबिलिटेशन काउंसिलिंग, सामाजिक कार्यों आदि से जोड़ने की आवश्यकता होती है। उपचार उपरांत नियमित व्यायाम, धूम्रपान त्याग, शराब छोड़ना या सुरक्षित सीमा में मद्दपान, वजन घटाने, कम वसा वाले दुग्ध उत्पाद लेने, लाल मांस कम खाने और नमक का उपयोग घटाने से पीडि़त को जल्द स्वस्थ होने में मदद मिलती है।

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