तूफान-ओलावृष्टि ने तोड़ी कमर

किसान समिति ने उठाई नुकसान के आकलन की मांग, उचित मुआवजा भी मांगा

 शिमला  —शिमला, सिरमौर, चंबा सोलन व कुल्लू जिलों में तूफान व ओलावृष्टि से फलों व सब्जियों को भारी क्षति हुई है। किसान सभा ने राज्य सरकार से मांग  कि प्रभावित क्षेत्रों में तुरंत सर्वेक्षण किया जाए। सर्वेक्षण कर प्रभावित किसानों व बागबानों को उचित मुआवजा दिया जाए। किसान समिति के मुताबिक तूफान व ओलावृष्टि से करोड़ों की फसल को नुकसान पहुंचा है। किसान समिति के सचिव संजय चौहान ने कहा कि तूफान व ओलावृष्टि से सबसे अधिक नुकसान शिमला जिला के नेरवा बमटा, ठियोग की भराना कमाह, संधू, मतियाना, चियोग, फागू, घूंड, बगैन, सरीवन, सिरमौर के हरिपुरधार, नोहराधार, संगड़ाह, शिलाई  क्षेत्रों में हुआ है। इसमें सेब, नाशपाती, प्लम, खुमानी, बादाम, गोभी, टमाटर की फसल लगभग तबाह हो गई है। अंधड़ व तूफान की गति इतनी अधिक थी कि कई जगह तो पेड़ व मकानों की छतें ही बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई हैं। ओलावृष्टि से बचने के लिए जिन बागबानों ने जालियां डाल रखी थी, उनकी जालियां भी टूट गई, जिससे पौधों से काफी मात्रा में फल झड़ गए हैं। इस तूफान व ओलावृष्टि से करोड़ों की फसल बर्बाद हो गई है। ओलावृष्टि ने किसानों व बागबानों की कमर तोड़ कर रख दी है। उन्होंने राज्य सरकार से प्रभावित क्षेत्रों में फसल की बर्बादी का तुरंत आकलन करवाने की मांग उठाई है और नुकसान का आकलन लगाकर प्रभावित किसानों व बागबानों को उचित मुआवजा देने को कहा है। उनका कहना है कि इसके साथ जिन किसानों व बागबानों को फसल बीमा योजना के तहत लिया गया है, उन्हें तुरंत मुआवजा राशि बीमा कंपनी द्वारा प्रदान की जाए।

18 जून को ठियोग में बैठक

किसान संघर्ष समिति मांगों को लेंकर अन्य किसान संगठनों के साथ मिलकर एक बैठक 18 जून को ठियोग में आयोजित की जाएगी। इन मांगों को लेकर एक ज्ञापन एसडीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री को दिया जाएगा।

 

 

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