दुर्गा सहस्रनाम स्तोत्रम्

-गतांक से आगे…

ज्ञानेश्वरी पीतचेला वेदवेदाङ्गपारगा।

मनस्विनी मन्युमाता महामन्युसमुद्भवा।। 106।।

अमन्युरमृतास्वादा पुरंदरपरिष्टुता।

अशोच्या भिन्नविषया हिरण्यरजतप्रिया।। 107।।

हिरण्यजननी भीमा हेमाभरणभूषिता।

विभ्राजमाना दुर्ज्ञेया ज्योतिष्टोमफलप्रदा।। 108।।

महानिद्रासमुत्पत्तिरनिद्रा सत्यदेवता।

दीर्घा ककुद्मिनी पिङ्गजटाधारा मनोज्ञधीः।। 109।।

महाश्रया रमोत्पन्ना तमःपारे प्रतिष्ठिता।

त्रितत्त्वमाता त्रिविधा सुसूक्ष्मा पद्मसंश्रया।। 110।।

शांत्यतीतकलाऽतीतविकारा श्वेतचेलिका।

चित्रमाया शिवज्ञानस्वरूपा दैत्यमाथिनी।। 111।।

काश्यपी कालसर्पाभवेणिका शास्त्रयोनिका।

त्रयीमूर्तिः क्रियामूर्तिश्चतुर्वर्गा च दर्शिनी।। 112।।

नारायणी नरोत्पन्ना कौमुदी कांतिधारिणी।

कौशिकी ललिता लीला परावरविभाविनी।। 113।।

वरेण्याऽद्भुतमहात्म्या वडवा वामलोचना।

सुभद्रा चेतनाराध्या शांतिदा शांतिवर्धिनी।। 114।।

जयादिशक्तिजननी शक्तिचक्रप्रवर्तिका।

त्रिशक्तिजननी जन्या षट्सूत्रपरिवर्णिता।। 115।। 

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