दूरवर्ती क्षेत्रों में निवेश पर ज्यादा रियायतें

सरकार एक्स्ट्रा बेनेफिट देने के लिए तैयार, आधारभूत ढांचे पर करना होगा काम

शिमला – राज्य की सीमाओं से हटकर दूरवर्ती क्षेत्रों में निवेश करने पर उद्योगपतियों को अन्यों के मुकाबले अधिक लाभ मिलेंगे। अपनी नई इंडस्ट्रियल पालिसी में सरकार ने यह प्रावधान रखा है। सरकार ने पालिसी में साफ कर दिया है कि जो निवेशक सीमाओं से हटकर राज्य के भीतरी क्षेत्रों या दूरवर्ती क्षेत्रों में निवेश के लिए आएंगे, उन्हें उपलब्ध रियायतों से अधिक लाभ दिया जाएगा। इस तरह के निवेश की संभावनाआें को देखते हुए सरकार उन क्षेत्रों में आधारभूत ढांचे को विकसित करने पर भी काम करेगी। इन क्षेत्रों में अभी आधारभूत ढांचा उपलब्ध नहीं है और निवेशक पहले इसकी डिमांड रखेगा, जिस पर सरकार सोच रही है। यही वजह है कि उसने संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए आगे वहां पर काम करने की सोची है। यदि किसी क्षेत्र विशेष में निवेशक अधिक रुचि दिखाते हैं, तो वहां पर आधारभूत सुविधाओं के लिए उनकी जो डिमांड होगी, उसे पूरा किया जाएगा, इसका विश्वास भी इंडस्ट्रियल पालिसी में जताया गया है। पालिसी में सरकार ने तीन तरह के क्षेत्र चिन्हित किए हैं, जिन्हें तीन श्रेणी में बांटा गया है। इसमें ए, बी व सी श्रेणी को रखा गया है। ए श्रेणी प्रदेश का सीमावर्ती क्षेत्र होगा जहां पर निवेश सबसे ज्यादा इच्छुक रहते हैं, वहीं बी श्रेणी में राज्य के भीतरी क्षेत्र आते हैं, जहां पर अभी उस रफ्तार से इंडस्ट्री नहीं पहुंची है। सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती भीतरी व दूरवर्ती क्षेत्रों में उद्योगों को पहुंचाने की है, जिससे वहां पर विकास हो और स्थानीय स्तर पर रोजगार भी हासिल हो सके। सी श्रेणी में दूरवर्ती क्षेत्र रखे गए हैं। अहम बात यह भी है कि इन सभी श्रेणी के क्षेत्रों में सरकार ने लैंड बैंक जुटाया है। यहां पर उद्योग विभाग ने जहां खुद जमीन की खरीद करके रखी है, वहीं लोगों को भी उनकी जमीन निवेशकों को बेचने के लिए व्यवस्था की है।

करोड़ों रुपए चाहिए

भीतरी व दूरवर्ती क्षेत्रों में आधारभूत ढांचा विकसित करने के लिए सरकार को करोड़ों रुपए की दरकार रहेगी। निवेशकों की डिमांड किस तरह की रहती है, यह देखना होगा। वैसे रियायतें इन स्थानों पर दूसरों से अधिक देने का वादा सरकार ने किया है।

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