देवसदन कुल्लू में मनाया व्यंग्य महोत्सव

कुल्लू—देवसदन कुल्लू में व्यंग्य महोत्सव का आयोजन किया गया, जिसमें राजस्थान, महाराष्ट्र, जम्मू व कश्मीर, बिहार, दिल्ली, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश शहरों के व्यंग्य लेखक शामिल हुए। इस मौके पर मुख्यातिथि के डा. गंगाराम राजी, डा. हरीश पाठक, डा. सूरत ठाकुर ने व्यंग्य यात्रा पत्रिका का लोकार्पण किया। वहीं, साथ ही चर्चित व्यंग्यकार डा. लालित्य ललित के व्यंग्य संचयन प्रेम जनमेजय की श्रेष्ठ व्यंग्य कथाएं, लालित्य ललित के कविता संग्रह सितम प्यार के व अंबाला से प्रकाशित पुष्पगंधा का लालित्य ललित पर केंद्रित व्यंग्य अंक, जम्मू कश्मीर से पधारी व्यंग्यकार अनिला चड़क की व्यंग्य कृति श्रोताओं के अकाल का लोकार्पण किया गया। मंचस्थ अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई। इस मौके पर साहित्य कला परिषद की ओर से अध्यक्ष डा. सूरत ठाकुर ने मंचस्थ अतिथियों का स्वागत हिमाचली टोपी से किया। साथ ही चेतना इंडिया की ओर से इस मौके पर प्रेमजनमेजय व लालित्य ललित को सम्मानित किया गया। दशार्क फाउंडेशन, दिल्ली की ओर से संस्था के अध्यक्ष पवन चोटिया व उपाध्यक्ष सुनीता शानू ने सुपरिचित व्यंग्यकार डा. प्रेमजनमेजय का सम्मान किया। इस अवसर पर सम्मान के तौर पर संस्था की तरफ से श्रीफल, शाल व नगद 51 सौ रुपए की राशि भी भेंट की गई। आमंत्रित साहित्यकारों ने दस दर्जन व्यंग्य कृतियां डा. सूरत ठाकुर को कुल्लू के पाठकों के लिए भेंट की। इस अवसर पर डा. प्रेम जनमेजय ने कहा कि इस तरह के आयोजन से निश्चित ही व्यंग्य की दशा और दिशा को बल मिलता है और हमें अपना लक्ष्य साधने में भी सुविधा होती हैं व व्यंग्य यात्रा ने अपनी यात्रा सूरत ठाकुर जैसे फकीरों तय की हैं।  महाराष्ट्र से आमंत्रित वरिष्ठ पत्रकार हरीश पाठक ने कहा व्यंग्य का मूल तत्त्व भाषा की विसंगतियां और विडंबना है। इसलिए कथ्य को प्राथमिकता दी जाती है। शिल्प का बेहतर प्रयोग किया जाना चाहिए। वरिष्ठ साहित्यकार व मुख्यातिथि सुंदरनगर से पधारे डा. गंगाराम राजी ने कहा  व्यंग्य यात्रा का जो काम परसाई ने नहीं किया वह काम डा. प्रेमजनमेजय ने किया।

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