देशी केंचुए जमीन के सच्चे साथी

Jun 10th, 2019 12:05 am

पालमपुर—देशी केंचुए गहरी भूमि में से मिट्टी खाकर खनिज तत्त्व को अपने साथ ऊपर लाते हैं और इसके बाद विष्ठा के रूप में जमीन सतह पर छोड़ देते है और एक नया छेद बनाकर दोबारा गहरी भूमि में चले जाते हैं। इस प्रकार एक केंचुआ दिन में कई बार ऊपर-नीचे आता जाता है और यह प्रक्रिया दिन के 24 घंटे और साल में 365 दिन चलती रहती है। इस प्रक्रिया से भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ती है । इसके साथ- साथ भूमि में अनंत करोड़ सूक्ष्म छेद बन जाते हैं, जो कि बरसात के पानी को सोख लेते हैं। बरसात का सारा का सारा पानी भूमि में समा जाता है और बाढ़ नहीं आती है ओर भूमि का जलस्तर भी बढ़ जाता है । इस सारी प्रक्रिया से भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ती है। भूमि में नमी बनाए रखने तथा केंचुआ की संख्या बढ़ाने और जीवाणुओं की संख्या बनाए रखने के लिए अच्छादन का महत्त्वपूर्ण योगदान है। अच्छादन की चार विधियां हैं, मृदा आच्छादन, कास्ट अच्छादन,  संजीव अच्छादन व मिश्रित फसलें। मृदा अच्छादन से भूमि में हवा संचालन वर्षा जल संग्रह एवं खरपतवार नियंत्रण किया जाता है उन्होंने बताया कि भूमि की 4.5 इंच की मिट्टी की सतह में 88 से 92 प्रतिषत सूक्षम जीवाणु और 95 फीसद सूक्षम में जड़े होती हैं, इससे ह्यूमस का निर्माण होता है । जुताई से भूमि में हवा का संचार होता है, ताकि प्राणवायु जीवाणुओ और जड़ों को उपलब्ध हो सके । इससे जीवन को व्यवस्था होती है। खेतों की जुताई करने का मुख्य उद्देश्य बारिश का पानी मिट्टी में संग्रहित करना और खरपतवार को नियंत्रण करना है। प्राकृतिक खेती के जनक पदमश्री सुभाश पालेकर के अनुसार सारी संजीवता भूमि की 4.5 इंच की सतह पर ही पाई जाती है। अतः यह एक आरक्षित अधिकोश है। इसलिए 4.5 इंच की मिट्टी को सुरक्षित रखना चाहिए और भूमि में गहरी जुताई नहीं करनी चाहिए।

अच्छादन की चार विधिया हैं

अच्छादन की चार विधियां हैं, मृदा आच्छादन, कास्ट अच्छादन,  संजीव अच्छादन व मिश्रित फसलें। मृदा अच्छादन से भूमि में हवा संचालन वर्षा जल संग्रह एवं खरपतवार नियंत्रण किया जाता है उन्होंने बताया कि भूमि की 4.5 इंच की मिट्टी की सतह में 88 से 92 प्रतिषत सूक्षम जीवाणु और 95 फीसद सूक्षम में जड़े होती हैं, इससे ह्यूमस का निर्माण होता है ।

आज होगा प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन

प्रदेष कृशि विवि में कृशि विवि के सहयोग से आयोजित किए जा रहे छह दिवसीय सुभाश पालेकर प्राकृतिक खेती प्रषिक्षण षिविर का समापन सोमवार को होगा। इस प्रषिक्षण षिविर में छह जिलों के करीब आठ सौ किसानों के साथ अन्य प्रदेषों से किसान भी षिरकत कर रहे हैं। प्राकृतिक खेती के जनक सुभाश पालेकर ने प्रदेष में प्राकृतिक खेती की संभावनाएं बढि़या बताई हैं।

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