धर्मपुर में स्वच्छ भारत मिशन फेल

धर्मपुर—जिला मंडी में वर्ष 2004-2005 से चला आ रहा स्वच्छता अभियान अभी भी चला है। चाहे अब इसका नाम बदलकर स्वच्छ भारत मिशन हो गया हो, लेकिन वास्तव में वही ही अभियान है जिसके चलते समूचे ग्रामीण हो चाहे शहरी क्षेत्र उनमें हर तरह से साफ-सुथरा रखना हर जगह कूड़ेदान लगवाना। वहीं सभी घरों में शौचालयों की व्यवस्था करना और उनका इस्तेमाल करना ठोस व तरल  कचरे का निपटान सही तरीके से करना पाठशालाओं में भी स्वच्छता का पूरा प्रबंधन करना बड़े कार्यक्रमों मेले रैली भंडारे आदि जैसे कार्यक्रमों से फैलने वाली गंदगी का निपटान भी सही तरीके से करना शामिल रहा है। जिसके चलते जिला मंडी के मुखिया जिलाधीश मंडी की कुछ मामलों में स्वच्छता के क्षेत्र में बढि़या काम होने पर पीठ भी कई बार थपथपाई गई है। इसके तहत बहुत सी पंचायतों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित भी किया जा चुका है लेकिन जब जिला के धर्मपुर उपमंडल मुख्यालय की ओर जब नजर दौड़ाई जाती है तो लगता है कि जिस अभियान को चलाने के लिए किसी संस्था को करोड़ों रुपए दिए गए। चाहे वह अस्पताल रोड हो चाहे भरेंड नाला या धर्मपुर का बस अड्डे के पास वाला स्थान हर जगह कूद भरा मिलेगा इतना ही नहीं जहां तक खुले में शौच न करने की बात है तो वह हर कोई सुबह का आलम उस वक्त देखने को मिल ही जाता है। जब सुबह चार बजे से ही सोन खड्ड में शौच करने वालों का तांता लग जाता है जिससे कांडापतंन स्थित उठाऊ पेयजल योजनाओं का पानी कितना दूषित ही रहा है। किसी को कोई ख्याल नहीं है इसके लिए न तो स्थानीय प्रशासन  कोई कदम उठा रहा है न ही स्वास्थ्य विभाग अभी तक सचेत है कि कहीं दूषित पानी के प्रयोग से किसी तरह की महामारी ही न फैल जाए और न ही अभी तक स्थानीय पंचायत ने किसी को खुले शौच जाने से रोका है और न ही अभी तक कूड़े कचरे के निपटान का कोई प्रबंध किए हैं। वहीं धर्मपुर पंचायत के प्रधान ठाकुर दास ने कहा कि स्थानीय लोगों को कई बार नोटिस देकर व मौखिक तौर पर बताया गया है। उन्होंने कहा कि कूड़े कचरे को हर कहीं फेंकने वालों की पहचान करके उनके खिलाफ  मामले बनाकर उपमंडलाधिकारी धर्मपुर के कार्यालय में दर्ज करवाएंगे।

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