धर्मशाला कालेज में आईटी इंजीनियरिंग

एसआईटी ने 60 सीटों को दिखाई हरी झंडी

धर्मशाला – हिमाचल के सबसे पुराने व बड़े कालेजों में शुमार धर्मशाला कालेज के नाम के साथ एक और बड़ी उपलब्धि जुड़ने जा रही है। पीजी कालेज धर्मशाला में इसी शैक्षणिक सत्र से आईटी इंजीनियरिंग की पढ़ाई करवाई जाएगी। इसके लिए आल इंडिया कांउसिल ऑफ टेक्निकल एजुकेशन (एआईसीटी) की टीम ने शैक्षणिक सत्र से 60 सीटों के लिए हरी झंडी प्रदान कर दी है। अब मात्र धर्मशाला कालेज को लिखित में ऑफिशियल अप्रूवल आने ही बाकी हैं, जिसके बाद इसी सत्र से कक्षाएं बिठाने के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी, जिससे छात्रों को इंजीनियर बनने के लिए बाहरी राज्यों में जाने को मजबूर नहीं होना पड़ेगा। इसके साथ ही धर्मशाला कालेज प्रदेश का एकमात्र ऐसा महाविद्यालय बन जाएगा, जहां छात्रों को इंजीनियरिंग की पढ़ाई करवाई जाएगी, जिससे आने वाले समय में प्रदेश के अन्य कालेजों में भी इंजीनियरिंग विषय पढ़ाए जाने के स्कोप भी बढ़ जाएंगे। वर्ष 1926 से प्रदेश ही नहीं, देश भर सहित पड़ोसी राज्यों के छात्रों को भी शिक्षित करने का जिम्मा संभाल रहे पीजी कालेज धर्मशाला में अब इंजीनियर भी बन सकेंगे। महाविद्यालय में आईटी इंजीनियरिंग शुरू होने से मेहनती व गरीब छात्र भी अपने अंकों के आधार पर दाखिला पाकर अपने सपने साकार कर पाएंगे। चार साल की इंजीनियरिंग पढ़ाई में हर साल 60 छात्रों को दाखिला देने का प्रोपोजल बनाया गया है। इसके तहत ही पहले सत्र में 60 सीटों पर दाखिला प्रदान किया जाएगा। धर्मशाला कालेज में ऐसे कोर्स पढ़ाने के लिए प्रोफेशनल, वोकेशनल और एड ऑन कोर्स सोसायटी के तहत काम चल रहा है, जिससे शैक्षणिक सत्र में फाइनल अप्रूवल मिलने के बाद व्यवस्था शुरू किया जा सके। निजी क्षेत्र में अच्छे संस्थानों से इंजीनियरिंग करने के लिए युवाओं को या तो राज्य से बाहर जाना पड़ता है या अधिक फीस के चलते अपने इरादे बदलने पड़ते हैं, लेकिन सरकारी कालेज में पहली बार ऐसी सुविधाएं मिलने से इस क्षेत्र में आगे बढ़ने वाले युवाओं को नई राह मिलेगी। आईटी में इंजीनियरिंग करने के बाद पहाड़ की शांत वादियों में बैठकर भविष्य तलाशने वाले युवाओं के लिए भी यह एक उपयुक्त मंच होगा। पीजी कालेज धर्मशाला के प्रिंसीपल प्रो. ज्योति कुमार शर्मा ने बताया कि एआईसीटी की टीम ने दौरा कर मूलभूत जरूरतें देखी थीं, जिसके बाद रिपोर्ट के आधार पर अप्रूवल मिल गई है। उन्होंने बताया कि फाइनल ऑफिशियल अप्रूवल के बाद इसी सत्र से इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू कर दी जाएगी।

बन जाएगा पहला ऐसा महाविद्यालय

निजी क्षेत्र में शुरू हुए करीब डेढ़ दर्जन से अधिक इंजीनियरिंग कालेज भले ही कम्प्यूटर साइंस इंजीनियरिंग नहीं चला पाए हों, लेकिन धर्मशाला महाविद्यालय ने कुछ नया करने का मन बनाकर नई पहल की है। केंद्र से हरी झंडी मिलने के बाद अब प्रदेश का पहला ऐसा महाविद्यालय बन गया है, जहां बीए, बीकॉम, एमबीए, एमसीए व बीएससी सहित पांच विषयों में पीजी कक्षाओं के अलावा इंजीनियरिंग की पढ़ाई भी करवाई जाएगी।

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