धार को पानी देने पर भड़की कठयांहु पंचायत

सुंदरनगर—उठाऊ पेयजल योजना जनलग तयांबला कठयांहु पंप हाउस की स्कीम का पानी घड़यातर पंचायत के धार गांव को ले जाने पर कठयांहु पंचायत की जनता के विरोध के स्वर तीखे हो गए हैं। रविवार को इस संदर्भ में कठयांहु पंचायत के विभिन्न वार्डों के लोग उठाऊ पेयजल योजना में एकजुट हुए और आईपीएच विभाग की कार्यप्रणाली के प्रति गहरा रोष व्यक्त करते हुए नारेबाजी की और विभाग को चेताया कि अगर इस योजना से पानी की एक भी बूंद दूसरी पंचायत के गांव को वितरित की गई, तो आने वाले समय में ग्राम पंचायत कठयांहु की जनता एकजुट होकर सड़कों पर उतरेगी और आंदोलन का रुख अख्तियार करेगी, जिसके लिए शासन और प्रशासन सीधे तौर पर जिम्मेदार होगा। ग्रामीणों में लेख राम, बिट्टू बबलू, धर्म सिंह, नारायण, वार्ड मेंबर टेक चंद, कर्म चंद, बंसी लाल, प्रकाश, दिले राम, प्रेम सिंह, रमेश बाली, राम, मनोज, सपना, लता, विमला, विद्या, सरला, महिला मंडल कठयांहु एक वार्ड व दो समेत कठयांहु पंचायत की तमाम जनता का कहना है कि तकरीबन एक दशक पहले इस पेयजल योजना मंंे बोरवैल करने को लेकर ग्रामीणों ने हामी भरी थी, लेकिन साथ में लगती पंचायत के धार गांव के लोगों ने उस समय बोरवेल करने को लेकर विरोध जताया था, लेकिन पिछले वर्ष जब बोरवेल का निर्माण कार्य पूरा हुआ तो इस वर्ष आईपीएच विभाग धार गांव को इस पेयजल योजना से पानी लिफ्ट करने को लेकर कार्रवाई करने शुरू कर दी है, जिसके विरोध में ग्रामीणों ने एकजुट होकर इस पेयजल योजना से एक भी बूंद पानी की दूसरे गांव को न देने को लेकर अपना विरोध जताया है और विभाग को दो टूक शब्दों में कहा है कि अगर विभाग ने निर्णय नहीं बदला तो आने वाले समय में  पंचायत की तमाम जनता सड़कों पर उतरकर आंदोलन का रुख अख्तियार करेगी और चक्काजाम करने से पीछे नहीं हटेगी। बताया जा रहा है कि इस योजना में पहले ही पानी की काफी कमी है, जिससे कठयांहु गांव के लोगों के ही पेयजल की पूर्ति नहीं होती है और ऊपर से विभाग के इस तरह के ढुलमुल रवैए से ग्रामीण काफी आहत हैं। उधर, कठयांहु पंचायत के प्रधान गीतानंद और वार्ड मेंबर बंसी लाल ने कहा कि इस पेयजल योजना से दूसरे गांवों को पेयजल की आपूर्ति किसी भी सूरत में नहीं होने दी जाएगी और आने वाली ग्राम सभा में एक प्रस्ताव पारित करके विभाग और सरकार को प्रेषित किया जाएगा कि इस पेयजल योजना से कोई भी छेड़छाड़ भविष्य में न की जाए। अन्यथा ग्रामीण एकजुट होकर शासन और प्रशासन के प्रति उनका आंदोलनकारी रुख अख्तियार करेंगे।

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