नए निवेशक दें ध्यान

नए साल का प्रारंभ नए संकल्पों का समय होता है। इसलिए इस साल से लंबी अवधि के लिए निवेश शुरू करें। हम में से कुछ के लिए तो यह कथन कई सालों से प्राथमिकता सूची में हैं, लेकिन अभी तक उनके द्वारा यह लागू नहीं किया जा सका है। आपको ऐसे भी लोग  मिलेंगे, जिनका निवेश कौशल आपको प्रभावित करेगा। मगर याद रखें कि कम समय में जोखिम भरे दांव लगाने की तुलना में धैर्य से लिए गए निर्णय हमारा भविष्य बदल सकते हैं…

देव की वित्तीय दवा

 करुणेश देव बैंकिंग प्रोफेशनल रहने के साथ ही कुछ बड़े विदेशी बैंकों व इंश्योरेंस कंपनियों संग काम कर चुके हैं

 वर्तमान में पर्सनल फाइनांस और प्लानिंग में लेखन व शिक्षण

लेखक : करुणेश देव

कुछ सरल, पर महत्त्वपूर्ण तथ्य

कुछ महत्त्वपूर्ण पहलू जो सरल दिखते हैं, मगर नए निवेशकों की निवेश यात्रा में एक उल्लेखनीय अंतर ला सकते हैं। निवेशक निवेश से पहले इन महत्त्वपूर्ण पहलुओं पर ध्यान जरूर दें…

  1. समझें और संपत्ति आबंटन में बने रहें : यह पोर्टफोलियो निर्माण का आधार है। आसान शब्दों में कहें, तो हमें तीन श्रेणियों में से चुनना होगा। 1. नकदी, बचत और बैंक जमा, निश्चित आय संपत्ति, सरकारी व कॉरपोरेट बांड्स व डिपॉजिट सर्टिफिकेट इत्यादि। 2. इक्विटीज-शेयर बाजार से संबंधित। कुछ लोग इसमें सोने और अचल संपत्ति को भी शामिल करते हैं, किंतु वह एक अलग चर्चा का विषय है। 3. संपत्ति आबंटन को निवेश से जुड़े लक्ष्यों और उद्देश्यों के साथ जोड़ा जाना चाहिए। यह एक निवेशक के दृष्टिकोण से सभी पहलुओं का ध्यान रखता है, जैसे जोखिम प्रबंधन, बाजार की अस्थिरता, लाभ-हानि और पोर्टफोलियो रिटर्न आदि।
  2. निवेशों के प्रदर्शन का करें आकलन : बहुत ही कम निवेशक अपने निवेश का एक निश्चित अवधि में निरीक्षण करते हैं। पहली अप्रैल से 31 मार्च, क्योंकि यह वार्षिक कराधान प्रक्रिया के साथ मेल खाता है। वहीं, कुछ श्रेणी के निवेशों के लिए पहली जनवरी से 31 दिसंबर का मापदंड भी सही रहता है। आम तौर पर नियमित अंतराल पर समीक्षा का सुझाव दिया जाता है। हालांकि वर्ष में एक बार तो यह अनिवार्य है। ऐसा करने से आपके पास विभिन्न श्रेणी के निवेशों को जोड़ने, हटाने या बदलने का विकल्प भी होता है।
  3. एक तय समयसीमा के साथ करें निवेश : हमारे पास उद्देश्य की स्पष्टता और एक योजना होनी चाहिए, जिसमें परिभाषित रहे कि यदि ऐसा होता है, तो मैं इसे बेचूंगा। यदि यह लक्ष्य भंग हो गया अथवा प्राप्त हुआ, तो मैं बेचूंगा या और अधिक निवेश करूंगा। किसी भी वित्तीय उत्पाद को खरीदते ही हम उससे भावनात्मक रूप से जुड़ जाते हैं। निवेश करने से पहले न्यूनतम और अधिकतम समय सीमा तथा एक स्पष्ट रणनीति का होना आवश्यक है। यह और भी आसान हो जाता है, जब हमारे निवेश वित्तीय लक्ष्यों के साथ जुड़े हों।
  4. अपनी बचत दर बढ़ाएं : धन सृजन के मार्ग में मुद्रास्फीति सबसे बड़ी बाधा रही है और भविष्य में भी रहेगी। हम इसे चाह कर भी दूर नहीं कर सकते। आवश्यकता के अनुसार बचत दर में बदलाव लाना आवश्यक है। एक उदाहरण लेते हैं। मान लीजिए कि आपने साल 2012 में नौकरी शुरू की और प्रति माह 3000 रुपए की बचत कर रहे थे। यह आपके उस समय के वेतन 30000 रूपए प्रति महीने का दस फीसदी था। आपको लगता होगा कि आपने अब तक इसे जारी रखते हुए अच्छा काम किया है। किंतु आज नौकरी बदलने के बाद जब आपका वेतन प्रति माह 120000 रुपए है, वही 3000 रुपए की बचत आपके मासिक वेतन का केवल 2.5 फीसदी है। अपनी सालाना आय में से कम से कम 15 फीदी की बचत दर का लक्ष्य रखें। यह भी महत्त्वपूर्ण है कि पांच से दस फीसदी का अतिरिक्त आबंटन हर वर्ष बढ़ाने से आपके पोर्टफोलियो के प्रदर्शन एवं दीर्घकालिक धन सृजन में उल्लेखनीय सुधार लाने में एक कारगर कदम होगा।
  5. आज और अभी की प्रवृत्ति को नकारें : आपका भविष्य समृद्ध और सुरक्षित तब बनेगा, जब आप आज अच्छा कमाते हैं, अधिक बचाते हैं एवं उचित निवेश करते हैं। जल्दी शुरुआत करने से कंपाउंडिंग अच्छी तरह काम करती है। इसका अर्थ है कि आपको भविष्य की सुरक्षा और आराम के लिए आज कुछ त्याग भी करना पड़ेगा। यदि आपमें हर समय कुछ खरीदने की लालसा रहती है, तो थोड़ा ठहरें और 30 दिन की चुनौती लें। इसमें आपको पहली से 30 तारीख तक इंतजार करना होगा। अंतिम दिन भी यदि आप उस वस्तु को खरीदना चाहते हैं तो अवश्य खरीद लें। केवल टैक्स बचत हेतु जनवरी-मार्च में कहीं निवेश न करें। यह बात समझ लें कि निवेश और दीर्घकलिक धनसृजन में आज और अभी कुछ नहीं होता।
  6. हमारा नियंत्रण क्षेत्र : कुछ ऐसे विषय हैं, जो कभी हमारे नियंत्रण में नहीं होंगे, जैसे राजकोषीय घाटा, व्यापारिक युद्ध, तेल और सोने की कीमतें तथा केंद्रीय बैंक की नीतियां। बहुत कम लोग इन बातों और अर्थव्यवस्था, बाजार और व्यापार पर इनसे होने वाले प्रभाव को समझ पाते हैं। ध्यान उन बातों पर दें, जो हमारे नियंत्रण में हैं। जैसे निवेश जल्दी आरंभ करना, बचत दर बढ़ाना, आय के अन्य स्रोत पैदा करना, लाभांश देने वाली संपत्ति में निवेश करना आदि। अपने नियंत्रण क्षेत्र को समझते हुए हमें केवल उन बातों का ध्यान रखना चाहिए, जिनसे हम अपने वर्तमान और भविष्य में एक सार्थक बदलाव ला सकते हैं।

और अंत में

निवेश और जीवन इन्हें सरल बनाए रखने में ही समझदारी है। अपने वित्तीय ज्ञान को विकसित करना हम सबके लिए उचित एवं सराहनीय कदम होगा। किसी भी वित्तीय निवेश से पहले हमें अपने ज्ञान सृजन में निवेश करना चाहिए, क्योंकि इसी से लंबी अवधि में सबसे शानदार रिटर्न मिल सकता है।

संपर्कः karuneshdev@rediffmail.com

You might also like