नापाक पाकिस्तान

पाकिस्तान की यही फितरत है। वह भारत के खिलाफ नापाक हरकतें करने के बहाने ढूंढता रहता है, लेकिन उसकी हुकूमत मिमियाती रहती है। वह गुहार करती रहती है कि दोनों देशों को बातचीत जारी रखनी चाहिए और दक्षिण एशिया में अमन-चैन का सूत्रधार बनना चाहिए। पाकिस्तान के वजीर-ए-आजम इमरान खान की जुबां में मिठास है, लेकिन उनकी फौज और एजेंसियां शरारत और साजिशों के खेल रचती रहती हैं। इस्लाम में रमजान का महीना बेहद पाक है। मुस्लिम ही नहीं, गैर-मुस्लिम भी रोजा खोलने पर इफ्तार पार्टी का आयोजन करते रहे हैं। हिंदुस्तान में भी ऐसी परंपरा है और पाकिस्तान तो इस्लामिक देश है। इस्लामाबाद में भारतीय उच्चायोग ने भी इफ्तार का दावतनामा कइयों को भेजा था, तो उस सूची में पाकिस्तानी भी थे और भारत की तरफ से सांसद, राजनयिक, अधिकारी, पत्रकार और सेवानिवृत्त सैन्य अफसरों, कारोबारियों आदि को न्योता दिया गया था। पाकिस्तान की पुलिस, एजेंसियों के प्रतिनिधियों और अन्य ने सुरक्षा जांच के नाम पर 300 से ज्यादा मेहमानों को रोका और उनके साथ बदसलूकी की। सवाल है कि क्या कभी कल्पना की जा सकती थी कि पाकिस्तान रमजान के पाक महीने में भी नापाक सलूक करेगा? आमंत्रित मेहमानों के साथ पाकिस्तान हुकूमत के अफसरान और सुरक्षाकर्मी धक्का-मुक्की करेंगे या बदसलूकी से पेश आएंगे? एक राजनयिक के घर में जबरन घुसेंगे और तोड़-फोड़ करेंगे? क्या राजनयिक मानदंडों का उल्लंघन नहीं किया गया? आखिर पाकिस्तान की ओर से ऐसा अपमान क्यों किया गया? यही नहीं, खबरें ये भी हैं कि पाकिस्तान की सरकारी एजेंसियों ने अनजान नंबरों से कइयों को फोन कर पार्टी में शामिल होने पर अंजाम भुगतने की धमकियां भी दीं। वहां की वरिष्ठ पत्रकार मेहरीन जाहरा मलिक ने ट्वीट किया-‘पुलिस और आतंकवाद रोधी बल ने इंडियन हाई कमीशन के इफ्तार में जाने वाले हर शख्स से बदसलूकी की।’ पाक पीपल्स पार्टी के नेता फरहतुल्ला बाबर ने बताया कि होटल की किलेबंदी की गई थी। उन्हें बताया गया कि इफ्तार पार्टी रद्द हो गई। यह पाकिस्तान का भारत के प्रति कौन-सा बर्ताव है? क्या इसी बिनाह पर वह द्विपक्षीय बातचीत के लिए मरा जा रहा है? हमने इसे पाकिस्तान की पुरानी फितरत करार दिया था। ऐसी नापाक हरकतें पहले भी की जाती रही हैं। भारत के दो राजनयिकों को लाहौर के पास बंद कमरे में बंद करके रखा गया। राजनयिक और अन्य लोग गुरुद्वारा सच्चा सौदा और ननकाना साहिब में दर्शन करने जाना चाहते थे। उन्हें प्रवेश करने से रोका गया। इसके अलावा, भारतीय उच्चायोग की वेबसाइट और इंटरनेट को ब्लॉक किया जाता रहा है। आखिर ऐसे रवैये के पीछे पाकिस्तान के मंसूबे क्या हैं? इस संदर्भ में उल्लेख किया जा सकता है कि भारत के प्रधानमंत्री मोदी ने शपथ ग्रहण समारोह में पाकिस्तान को दावतनामा नहीं भेजा और इस बार बिमस्टेक देशों के राष्ट्रपतियों और प्रधानमंत्रियों को आमंत्रित किया गया। यदि पाकिस्तान उसकी खुन्नस निकाल रहा है, तो यह उसकी कुंठा और बचपना है। इस तरह न तो भारत को झुकाया जा सकता है और न ही द्विपक्षीय बातचीत को सहमत किया जा सकता है। यह करके पाकिस्तान अपने प्रति मोदी सरकार की नीतियों को भी नरम नहीं करवा सकेगा, बल्कि वितृष्णा और टकराव के आसार और बढ़ेंगे। इफ्तार जैसे पाक मौके पर ऐसी बदसलूकी के लिए भारत सरकार ने अपना कड़ा विरोध दर्ज करा दिया है, लेकिन पाकिस्तान की फितरत के मद्देनजर क्या यह पर्याप्त होगा? भारत सरकार की आगे की प्रतिक्रिया भी सामने आ जाएगी।

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