निर्जला एकादशी पर कुंड में स्नान

कुल्लू —हर साल की तरह इस साल भी निर्जला एकादशी पर भगवान रघुनाथ जी के स्थायी निवास स्थान पर निर्जला एकादशी पूरे रीति -रिवाजों को निभाते हुए मनाई गई। यहां भगवान रघुनाथ जी की पूजा अर्चना के बाद सभी रस्में निभाई गईं। वहीं, दूर दूर से लोग भी भगवान रघुनाथ का आशीर्वाद लेने के लिए सुल्तानपुर पहुंचे। यहां सभी परंपराओं को निभाते हुए रघुनाथ जी की पूजा के बाद पुरोहितों ने मंदिर परिसर में बने एक कुंड के बीच स्नान किया। उसके बाद भगवान रघुनाथ जी पर भी पानी फेंका गया। इस दौरान भगवान रघुनाथ के छड़ीबदार महेश्वर सिंह ने निर्जला एकादशी का महत्त्व बताते हुए कहा कि आज का दिन सबसे गर्म माना जाता है। निर्जला एकादशी के व्रत से व्यक्ति को पूरे साल की 23 एकादशियों के पुण्य जितने फल की प्राप्ति होती है। निर्जला एकादशी को पांडव एकादशी या भीमसेन एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस व्रत से दीर्घायु और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

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