निश्चित दुकानों से वर्दी खरीदने के लिए मजबूर नहीं होंगे अभिभावक

चंडीगढ़ -राज्य में कुछ प्राइवेट स्कूलों द्वारा अभिभावकों के आर्थिक शोषण संबंधी मिली रिपोर्टों पर सख्त कार्रवाई करते हुए पंजाब के शिक्षा मंत्री विजय इंद्र सिंगला ने राज्य में स्थित सीबीएसई, आईसीएसई और पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड से मान्यता प्राप्त सभी स्कूलों को निर्देश जारी किए हैं कि वह मां-बाप को स्कूल द्वारा सुझाई गई दुकान-फर्म से किताबें या वर्दियां खरीदने के लिए मजबूर नहीं कर सकते। इसके साथ ही स्कूल परिसर में किताबें और वर्दियों की बिक्री पर भी रोक लगा दी गई है। उक्त हिदायतों को लागू करने संबंधी एक सप्ताह का समय देते हुए यह जानकारी भी दी गई कि जिन स्कूलों की वेबसाइट नहीं है वह जल्द से जल्द अपने स्कूल की वेबसाइट तैयार करवा कर किताबें और वर्दियों संबंधित सारी सूची अपलोड करें और इस संबंधी किसी किस्म की कोई कोताही या बहाना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इन हिदायतें की पालना के मद्देनजर स्कूलों की अचानक चैकिंग भी की जाएगी। यह आदेश यह भी स्पष्ट करते हैं कि उक्त हिदायतों की पालना न करने वाले स्कूलों के एनओसी रद्द कर दिए जाएंगे। इस संबंधी जारी किए दिशा-निर्देशों के मुताबिक स्कूल द्वारा लगाई गई वर्दी कम से कम तीन वर्ष के लिए लागू रहेगी और इस समय के दौरान वर्दी के रंग और डिजाइन में किसी किस्म की कोई तबदीली नहीं की जाएगी। वर्दी के रंग, डिजाइन, टेक्सचर /मैटीरियल आदि संबंधी सारी जानकारी स्कूल की वेबसाइट पर अपलोड कर दी जाए, जिससे रेडिमेड वर्दी किसी भी जगह से खरीदी जा सके या अपनी जरूरत के मुताबिक सिलवाई जा सकें। इसके साथ ही स्कूल अथॉरिटी के लिए यह भी लाजिमी किया गया है कि वह बोर्ड के सिलेबस पर आधारित प्रवानित किताबें ही इस्तेमाल की जाएं और इन किताबों की सूची स्कूल की वेबसाइट पर अपलोड की जाए, जिससे विद्यार्थी /माता-पिता अपनी सुविधा के मुताबिक किसी भी जगह से किताबें खरीद सकें।

 

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