नेता भी करें नियमों का पालन

 रूप सिंह नेगी, सोलन

कहने को तो देश में कायदे-कानून सब के लिए एक समान हैं और कानून से ऊपर कोई नहीं है, परंतु लगता नहीं है कि देश के राजनीतिक दलों एवं नेताओं द्वारा इन पर अमल किया जाता होगा। दिल्ली स्थित मीडिया सेंटर फार मीडिया स्टडीज रिपोर्ट की मानें तो हाल ही के लोकसभा चुनाव में राजनीतिक दलों एवं प्रत्याशियों ने लगभग साठ हजार करोड़ रुपए खर्च किए, जबकि चुनाव आयोग ने खर्च की सीमा तय की होती है। देश की  जनता अवश्य जानना चाहती है कि इतना धन आखिर आता कहां से है? क्या चुनाव आयोग के पास इनके खर्च का लेखा-जोखा है और किन-किन प्रत्याशियों ने सीमा से अधिक खर्च कर नियम-कानूनों को ठेंगा दिखाया  है। क्या चुनाव आयोग उन पर कानून के तहत कार्रवाई करेगा? क्या कोई बता पाएगा  कि यह धन काला था या सफेद? मेरे विचार में चुनाव आयोग को मूक दर्शक बन कर नहीं रहना चाहिए और संविधान द्वारा दी गई शक्ति का निष्पक्ष रूप से इस्तेमाल करना चाहिए।

 

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