नौणी विश्वविद्यालय की मान्यता खतरे में

छठे से 38वें पायदान पर गिरी रैकिंग, यूनिवर्सिटी में स्वीकृत पदों की संख्या भी रह गई आधी

सोलन – डा. वाईएस परमार विश्वविद्यालय नौणी की मान्यता पर खतरे के बादल मंडराने लगे हैं। बीते कुछ वर्षों में इस विश्वविद्यालय की रैंकिंग देश में छठे पायदान से खिसक कर जहां 38 पर पहुंच गई है, वहीं अध्यापकों के कुल स्वीकृत 185 पदों में से इनकी संख्या घटकर 97 रह गई है। आलम यह है कि अनुसंधान कार्यों में बीते तीन वर्षों में हुई व्यापक कटौती व दिल्ली सर्वाेच्च संस्था में तालमेल की कमी के कारण आईसीएआर ने बीते कुछ वर्षों से मात्र पौन तीन करोड़ रुपए ही अनुदान राशि के  रूप में भेजे हैं। इससे पूर्व वर्ष 2014 से 2016 के बीच नौणी विवि को 19 करोड़ रुपए की राशि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद दिल्ली से विभिन्न विकासात्मक कार्यों के लिए आई थी। उससे पूर्व की समयावधि में भी करोड़ों रुपए का अनुदान आईसीएआर से आता रहा है। विचारणीय विषय यह है कि फंड की कमी के कारण विवि प्रशासन छात्राओं के लिए छात्रावास की सुविधा भी पूरी तरह नहीं दे पाया। वर्तमान में भी एक ही रूम में चार-चार छात्राएं रह रही हैं। विवि प्रशासन द्वारा वसूली जा रही भारी-भरकम फीस ने पहले ही छात्र-छात्राओं के पसीने छुड़ा दिए हैं। बीते कुछ वर्षों से नौणी विश्वविद्यालय की साख निरंतर गिरती जा रही है। वर्ष 2013 में नौणी विवि की देश में छठी रैंकिंग थी, किंतु बीते वर्ष इसकी रैंकिंग 35वें स्थान पर आंकी गई है। सुविधाओं के अभाव, वैज्ञानिकों व अध्यापकों के रिक्त पदों की निरंतर बढ़ती संख्या के कारण इस विवि की मान्यता भी खतरे में पड़ती दिखाई दे रही है। यहां पर बागबानी व औद्यानिकी विषय में अध्यापकों की कुल स्वीकृत पदों की संख्या 185 है, किंतु वर्तमान में यह आंकड़ा मात्र 97 पदों तक ही सिमट कर रह गया है। बीते तीन वर्षों में एक भी नया भवन नहीं बन पाया। विडंबना यह है कि यहां से अध्ययनरत विद्यार्थी जहां भारतीय वन सेव परीक्षा को उत्तीर्ण करके विवि का नाम रोशन  करते थे, वहीं बीते कुछ समय में एक भी आईएफएस अधिकारी इस परीक्षा को उत्तीर्ण नहीं कर पाया। प्रत्येक क्षेत्र में इस विवि के घटते स्तर के कारण एशिया की प्रथम बागबानी व वानिकी विवि की रैंकिंग घटती जा रही है।

नए कुलपति की तलाश आज से

नौणी विश्वविद्यालय के नए कुलपति के मनोनयन प्रक्रिया हेतु आईसीएआर के महानिदेशक सात जून (शुक्रवार) को शिमला पहुंच रहे हैं। वर्तमान वाइस चांसलर डा. हरिचंद शर्मा 65 वर्ष की आयु के हो चुके हैं तथा उनकी विदाई लगभग तय है। नियमानुसार भी प्रदेश के किसी भी विश्वविद्यालय में वाइस चांसलर को सेवा विस्तार नहीं दिया जा सकता तथा सिर्फ पुनर्नियुक्ति दूसरे कार्यकाल के लिए की जा सकती है। अतः वर्तमान कुलपति की उम्र के कारण उन्हें सेवा विस्तार मिलने की संभावना भी शून्य के बराबर है तथा अब इस पद के लिए आए दर्जनों आवेदनों  की स्क्रूटनी भी शुक्रवार से शुरू हो जाएगी।

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