पक्षियों को मिले ठिकाना, तभी बना पाएं लोग आशियाना

पांवटा साहिब—प्रदेश में शहरी क्षेत्र मंे जब भी कोई नए मकान के लिए नगर परिषद या नगर निकाय से एनओसी लें तो उसे मकान मंे पक्षियों के लिए कम से कम दो घोंसले बनाने को कहें। यह नियम प्रदेश सरकार को लागू करना चाहिए और तभी मकान बनाने की परमिशन मिलनी चाहिए। यह सुझाव पांवटा साहिब की सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरण संरक्षण के लिए तत्त्पर समीर शर्मा ने प्रदेश सरकार को दिया है। उनका मानना है कि इस नियम के लागू होने से पर्यावरण संतुलन बना रह सकेगा और गर्मियों के मौसम में कम हो रहे पक्षी भी बचेंगे। समीर शर्मा का कहना है कि प्रदेश के अधिकतर नगरों मंे पर्यावरण संतुलन बिगड़ गया है। यही कारण है कि गर्मियों में नगरों का तापमान 45 डिग्री से भी ऊपर जा रहा है। हम उद्योग लगा रहे हैं, क्रशर स्थापित कर रहे हैं, वाहनों की तादाद सड़कों पर बढ़ रही है, लेकिन प्रदूषित होते पर्यावरण को बचाने के लिए ठोस कदम नहीं उठा रहे हैं। उनका कहना है कि पांवटा, कालाअंब, बीबीएन और ऊना के औद्योगिक क्षेत्रों में पर्यावरण असंतुलन चरम पर पहुंच गया है, तभी इन क्षेत्रों में गर्मियों मंे पारा 40 डिग्री से नीचे लुढ़कने का नाम नहीं ले रहा है। भारी गर्मी और पेड़ों के कटान के कारण ऐसे क्षेत्रों मंे पक्षियों की संख्या मंे लगातार गिरावट आ रही है। जाहिर तौर पर गर्मी की मार झेल रहे पक्षी या तो गर्मी से मर रहे हैं या इन क्षेत्रों से पलायन कर रहे हैं, जिससे पर्यावरण को खतरा पैदा हो रहा है। इसे बचाने के लिए प्रदेश सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को सुझाव दिया है कि उन्हें शहरी क्षेत्रों मंे नए बन रहे मकानों की एनओसी की स्वीकृति तभी देनी चाहिए जब नक्शे मंे पक्षियों के लिए कम से कम दो घोंसले और पानी की व्यवस्था हो। यही नहीं नगरों मंे पहले के बनाए गए मकानों के मालिकों से भी आह्वान करना चाहिए कि वो अपने मकान में पक्षियों के लिए घोंसले बनाएं, ताकि गर्मियों में लुप्त हो रहे पक्षियों का अस्तित्त्व बचाया जा सके। साथ ही हर परिवार को हर साल कम से कम दो पेड़ लगाने का नियम भी सरकार को बनाना चाहिए। इससे हम सुंदर पहाड़ी प्रदेश के अस्तित्त्व को बचा पाएंगे।

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