पहली जीरो बजट गेहूं तैयार रेट 50 रुपए किलो

पालमपुर –जीरो बजट प्राकृतिक खेती विधि के तहत गेहूं पर किया गया पहला टयल सफल रहा है। पालमपुर के भट्टूं क्षेत्र में बंसी किस्म की गेहूं का बीज लगाया गया था, जिसके परिणामों से विभाग उत्साहित है। प्रदेश    में प्राकृतिक तरीके से पहली बार उगाई गई खाद्यान्न फसल का प्रदर्शन प्रदेश कृषि विवि में जैविक तथा प्राकृतिक खेती पर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान किया गया, जहां पर यह गेहूं 50 रुपए प्रति किलो की दर बिक्री के लिए रखी गई थी। बंसी काफी पुरानी किस्म है । इसका पूना से छह क्विंटल बीज मंगवाया था व जिला कांगड़ा में करीब डेढ़ से दो हेक्टेयर में इसे लगाया गया था। इसका स्वाद व गुणवत्ता बहुत बढि़या है और हरियाणा में तो यह चार हजार रुपए क्विंटल की दर से बिक रही है। प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में जीरो बजट गेहूं की 15 क्विंटल पैदावार हुई है। यहां पर 25 से 28 क्विंटल प्रति हेक्टेयर पैदवार का लक्ष्य रखा गया है।

—डा. राजेश्वर चंदेल, शून्य लागत प्राकृतिक कृषि के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर

माटी के लाल

बांटेंगे कॉफी के 50 हजार बूटे

डा. विक्रम

हिमाचल एक्सीलेंस अवार्ड से सम्मानित डा. विक्रम इस बार भी कॉफी के 50 हजार बूटे बागबानों को फ्री में बांटने जा रहे हैं। डा.विक्रम बिलासपुर जिला में भराड़ी उपतहसील की मरहाणा पंचायत निवासी हैं। वह मंझोटी गावं में पिछले 19 साल से कॉफी पर शोध कर रहे हैं। हिमाचली किसान बागबानों की खातिर वह बरसों पहले कर्नाटक से कॉफी चंद्रागिरि किस्म लाए थे। कड़ी मेहनत के बाद उनकी नर्सरी में पौध तैयार हो रही है, जिसे वह हिमाचली बागबानों को फ्री में बांट रहे हैं। विक्रम ने दाल चीनी ,कपूर, हींग, सेब, आड़ू, के पौधों पर भी रिसर्च की है। गौर रहे कि डा विक्रम को प्रदेश का अग्रणी मीडिया ग्रुप उनके शानदार कार्याें के लिए एक्सीलेंस अवार्ड से सम्मानित कर चुका है। टिप्स : मेरी आज के किसानों से यही गुजारिश है, कि जो हमारी निचले क्षेत्रों में बंजर जमीन है वहां पर कॉफी की पैदावार अच्छी हो सकती है। क्योंकि हमारा जितना भी निचला क्षेत्र है  बंदरों आवारा पशुओं से भरा है उतना ही यहां फल, पौधे आदि से भरा हुआ है। इन पौधों के नीचे हम कॉफी के पौधे लगाए जा सकते हैं और कॉफी हमारी अंतरराष्ट्रीय फसल है। इसलिए मेरा नीचे किसानों से यही अनुरोध है कि वे यहां अधिक से अधिक  कॉफी के पौधे लगाएं।   -अजय शर्मा,भराड़ी

हाइब्रिड धान पर नहीं मिल रही सबसिडी

बीज मालिक किसानों से वसूल रहे मनमाने दाम, महकमे पर फिर उठे सवाल…

इन दिनों प्रदेश के मंडी, कांगड़ा, हमीरपुर सहित विभिन्न जिलों में धान+बीज की नर्सरी देने का कार्य शुरू हो चुका है, लेकिन किसानों को बहुप्रचलित धान की हाईब्रीड किस्म मसलन यूएस 312 व अन्य मुख्य किस्मों का बीज अनुदान पर नहीं मिल रहा है। उक्त बीजों की आरसी ने होने के कारण बाजार में न तो निजी क्षेत्र में और न ही सरकारी क्षेत्र में विपणन हुआ है। इसके चलते किसानों को निजी दुकानों की ओर रुख करना पड़ रहा है और बिना अनुदान महंगे दामों से बीज खरीदना पड़ रहा है। बल्ह घाटी के अग्रणी किसान मुरारी लाल, दिनेश, राज कुमार, अमित सेन, सतीश, पुरषोत्तम, शेर सिंह, राजेश सैनी का कहना है कि विभाग मनमर्जी से उन सस्ती किस्मों की खरीद करता है और किसानों को थोपता है जो प्रचलन से बाहर हो गई है या जिन्हें किसान पसंद नहीं करता है। किसान मौजूदा समय में यूएस 312, 6129 गोल्ड, कम अवधि की शाहीभोग व बीएच 21 बासमति, स्विफ्ट गोल्ड, 834 व युएस 323 किस्मों की मांग कर रहे है और यह अधिकतर किस्में कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर से भी प्रमाणित है, लेकिन विभाग प्रचलन से बाहर हो चुकी पुरानी, सस्ती एकम उत्पादन किस्मों को खरीद कर उन पर सब्सिडी दे रहा है। किसानों ने प्रदेश सरकार से किसानो की मांग अनुसार बीज उपलब्ध करवाने की मांग की है।

— जसवीर सिंह, सुंदरनगर 

  1. कृषि विभाग से रेट तय न होने की वजह से 6129 गोल्ड व स्विफ्ट गोल्ड किस्मों की बिक्त्री का करार नहीं हो पाया है।

– शान्या सिंह, क्षेत्रीय प्रबन्धक, बायर क्रॉप साइंस

  1. यूएस 312, 6129, स्विफ्ट गोल्ड इत्यादि किस्मों की आरसी नही हुई है। विभाग उन बीजों पर अनुदान देता है। जिनका रेट कॉन्ट्रैक्ट होता है।

– बीडी शर्मा, जिला कृषि अधिकारी, मंडी

महादंगल के लिए गंगथ तैयार

उत्तर भारत के सबसे बड़े दंगल के लिए बरतनों का शहर यानी गंगथ पूरी तरह सज गया है। तीन से छह जून तक चलने वाले महादंगल में इस पहले दिन हिमाचली पहलवानों को मौका दिया जाएगा। चार जून को दंगल गर्ल का चयन किया जाएगा। पांच जून को टॉप पहलवानों की तस्वीर क्लीयर हो जाएगी, जबकि छह जून को महादंगल में देश के नामी पहलवानों में से नंबर वन का फैसला होगा।

 जगदेव डढवाल, गंगथ

हिमाचल में उजड़ी खेती को बचाएंगे फूल

डा. संजय कुमार, निदेशक, सीएसआईआर -आईएचबीटी, पालमपुर

हिमाचल में बंदरों और सूअरों के अलावा लावारिस पशुओं ने किसानों की नाक में दम कर रखा है। हजारों किसानों ने खेती छोड़ दी है। इससे हर कोई चिंतित है। लगातार उजड़ रहे खेतों को बचाने के लिए सीएसआईआर पालमपुर ने अरोमा मिशन शुरू किया है।  हिमाचल को तीन भागों में बांटकर किसानों को फूलों की खेती के प्रति पेरित किया जाएगा।

योजना के तहत ऊना जैसे मैदानी इलाकों में जहां लेमन ग्रास लगवाया जाएगा, वहीं मध्यवर्ती ऊंचाई वाले इलाकों में गेंदा लहलहाएगा। इसी तरह ऊंचाई वाले क्षेत्र में जटामांसी, हिमरोज आदि से खेती बचाई जाएगी। वैज्ञानिकों के अनुसार ये वे फूल या पौधे हैं,जिनके पास बंदर, सूअर और दूसरे पशु फटकते तक नहीं हैं। यही नहीं इनकी बाजार में मांग भी खूब है। बताते हैं कि एक हेक्टेयर जमीन में ये पौधे लगाने से एक सीजन में डेढ़ लाख तक इन्कम हो सकती है। सीएसआईआर के अरोमा मिशन के अंर्तगत ‘प्रोफि टेबल अरोमेटिक क्राप्स फॅर अनहेंसिंग फार्म इनकम’  की सोच के तहत वैज्ञानिकों ने हिमाचल प्रदेश व साथ लगते क्षेत्रों के किसानों के लिए योजना बनाई है। वैज्ञानिकों ने गुलाब की हिमरोज, ज्वाला, नूरजहां और रानी साहिबा, जंगली गेदा की हिम गोल्ड, जटामांसी की हिमबाला, थिमसिंगली की हिम सुरभ, लेमन ग्रास की कृष्णा व शेखर आदि अनेक किस्में विकसित की हैं। 

जैसी ऊंचाई, वैसी वैरायटी

वैज्ञानिकों ने अलग-अलग उंचाई वाले क्षेत्रों में अलग-अलग किस्म के फूलों की खेती को प्रोत्साहित करने की योजना बनाई है। इसके तहत मैदानी, मध्यपवर्तीय व पवर्तीय क्षेत्रों में अधिक उत्पादन देने वाले फूलों कि किस्मों को तैयार करवाया जाएगा ताकि किसान अधिक से अधिक लाभ ले सकें। प्रदेश में लेमन ग्रास, गुलाब, जंगली गेंदा सहित अन्य फूलों की खेती की जाएगी। ‘सीएसआईआर-अरोमा मिशन के तहत किसानों को सगंध फूलों व पौधों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। सगंध फूलों ऐसी अनेक किस्में हैं जिनको जानवर भी नुकसान नहीं पहुंचाते।

गिरिपार से गुड न्यूज

3 हजार में एक मण लहसुन

गिरिपार के किसानों के लिए लहसुन का यह सीजन बड़ी राहत लेकर आया है। भले ही फसल इस बार थोड़ी कम है, लेकिन दाम भरपूर मिल रहे हैं। बड़े व्यापारी जहां खेतों में लहसुन खरीदने पहुंच रहे हैं, वहीं मंडियों में भी सफेद सोने की खूब कद्र हो रही है। बात शिलाई की हो, या फिर संगड़ाह की,एक मण लहसुन तीन हजार रुपए में बिक रहा है।  परचून में किलो के दाम 70 रुपए तक मिल रहे हैं। अपनी माटी टीम को किसानों ने बताया कि पिछली बार लहसुन महज 25 रुपए किलो बिका था,तब वे काफी मायूस थे, लेकिन इस बार सारी कमी पूरी हो गई।  किसान विनोद कुमार, कुशल सिंह, रविदत्त, हरिचंद व रामलाल आदि ने बताया कि वे पैदावार से भी खुश हैं। लहसुन कारोबारी अनिल कुमार व संतराम लालटा ने बताया कि इय बार काम करने का मजा आ रहा है।             -जय प्रकाश, संगड़ाह

15 जून तक होगा बंदगोभी का बीमा

मक्की, धान और टमाटर की फसल का 31 जुलाई तक करवा सकते हैं बीमा

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत कुल्लू जिला में खरीफ  सीजन की फसलों का बीमा करवाने के लिए अधिसूचना जारी कर दी गई है। इस योजना के तहत बंद गोभी, मक्की, धान, टमाटर और आलू का बीमा करवाया जा सकता है। कृषि विभाग के उपनिदेशक राजपाल शर्मा ने बताया कि बंदगोभी का बीमा 15 जून तक करवाया जा सकता है। इसके अलावा मक्की, धान और टमाटर के बीमे के लिए अंतिम तारीख 31 जुलाई तय की गई है। उन्होंने बताया कि आलू और बंदगोभी के बीमे के लिए प्रति बीघा तीन-तीन सौ रुपये प्रीमियम तय किया गया है। टमाटर के लिए प्रति बीघा 400 रुपए और मक्की व धान के लिए प्रति बीघा 48-48 रुपए प्रीमियम निर्धारित किया गया है। उपनिदेशक ने बताया कि न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी मक्की और धान का बीमा करेगी। टमाटर, आलू और बंदगोभी का बीमा एसबीआई जनरल इंश्योरेंस कंपनी करेगी। बीमा करवाने के लिए न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी के अधिकारी छेवांग तेनजिन के मोबाइल नंबर 9418014269 और एसबीआई जनरल इंश्योरेंस कंपनी के अधिकारी लेस राम के मोबाइल नंबर 9817546179 या 7807346179 पर संपर्क किया जा सकता है। उन्होंने कुल्लू जिला के किसानों-बागबानों से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ उठाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि इस योजना से संबंधित जानकारी प्राप्त करने के लिए किसान-बागबान विभाग के विषयवाद विशेषज्ञ, कृषि विकास अधिकारी या कृषि प्रसार अधिकारी से भी संपर्क कर सकते हैं।

धान और किसान..बड़े काम की है यह बात

प्रदेश में धान बीज कृषि विभाग के विक्रय केंद्रों पर किसानों की मांगनुसार मिलता है। महकमे द्वारा यह हर जिले-ब्लॉक स्तर के  विक्रय केंद्रों पर  भेजा जाता है। खास बात यह कि भले ही हिमाचल में फाइव जी की बातें हो रही हों,लेकिन अभी तक धान के बीजों की सप्लाई ऑनलाइन नहीं है। डायरेक्टर एग्रीकल्चर का कहना है कि इस बारे में विचार किया जाएगा। किसानों के लिए ऑनलाइन सिस्टम शुरू करने के प्रयास किए जाएंगे।

— प्रतिमा चौहान, शिमला

किसान बागबानों के सवाल

1  गर्मियों में मुर्गियों को बीमारी से बचाने के लिए क्या करें?

विनोद, ऊना

  1. अनार पर फूल आने के बाद उसे कीट से बचाने के लिए कौन सी दवाई का छिड़काव करें?

राजेंद्र, शिमला

आप सवाल करो, मिलेगा हर जवाब

आप हमें व्हाट्सऐप पर खेती-बागबानी से जुड़ी किसी भी तरह की जानकारी भेज सकते हैं। किसान-बागबानों के अलावा अगर आप पावर टिल्लर-वीडर विक्रेता हैं या फिर बीज विक्रेता हैं,तो हमसे किसी भी तरह की समस्या शेयर कर सकते हैं।  आपके पास नर्सरी या बागीचा है,तो उससे जुड़ी हर सफलता या समस्या हमसे साझा करें। यही नहीं, कृषि विभाग और सरकार से किसी प्रश्ना का जवाब नहीं मिल रहा तो हमें नीचे दिए नंबरों पर मैसेज और फोन करके बताएं। आपकी हर बात को सरकार और लोगों तक पहुंचाया जाएगा। इससे सरकार को आपकी सफलताओं और समस्याओं को जानने का मौका मिलेगा।

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