पहाड़ तपने से जंगलों में लगी आग से करोड़ों की वन सम्पदा स्वाहा

शिमला – गर्मी के कारण हिमाचल प्रदेश के जंगलों में भयंकर आग लगने से अब तक रिहायशी इलाकों में 38 तथा जंगलों में आग की 168 की घटनाएं हुई हैं। अकेले वन क्षेत्र सोलन और चैपाल के वन परिक्षेत्रों में पिछले पांच दिनों में आग की करीब 25 घटनाएं सामने आई। इन दिनों सोलन जिले के कंडाघाट और चैपाल के गियाऊ के गुंसा गांव के साथ लगते जंगलों में भंयकर आग लगी हुई है। आग लगने की यह घटना इस क्षेत्र की आज तक की सबसे बड़ी घटना बताई जा रही है। आग से वन विभाग का कई करोड़ों का नुकसान हो रहा है। अभी तक कई सैकड़ों पेड़ जल चुके हैं गांव को भी खतरा पैदा हो चुका है। स्थानीय लोग बुझाने की नाकाम कोशिश कर रहे हैं। यहां लाख कोशिशों के बावजूद आग पर काबू नहीं पाया जा सका है। वन परिक्षेत्र वन मंडल चैपाल के कोई भी कर्मचारी अभी तक मौके पर नहीं पहुंचे हैं। स्थानीय लोग इससे काफी नाराज हैं। वन मंत्री गोबिंद ठाकुर का कहना है कि हिमाचल में गर्मियां बढ़ते ही जंगलों में आगजनी की घटनाएं भी बढ़ने लगी हैं। पहाड़ों में तापमान में वृद्धि के बाद जंगलों की आग में हर साल इजाफा होता है और करोड़ों रुपए की वन संपदा इस आग की भेंट चढ़ जाती है। चीड़ के जंगलों में सबसे ज्यादा आगजनी की घटनाएं सामने आती है। रिहायशी इलाकों में अब तक अप्रैल महीने में 38 जबकि जंगली आग की 168 की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। उनके अनुसार इस सीजन में आगजनी की घटनाएं बीते वर्ष के मुकाबले काफी कम है। इस सीजन में 400 आगजनी की घटनाएं पेश आई है। वन विभाग के कर्मचारी आग बुझाने के लिए कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गयी है। सरकार जंगलों को बचाने के लिए जरुरत पड़ने पर हेलीकॉप्टर सेवाए लेने से भी पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने बताया कि जंगलो की आग रोकने के लिए स्थानीय लोगों, ग्राम पंचायतों, युवक मंडलों, महिला मंडलों और समाजसेवी संस्थाओ से भी इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सहयोग लिया जा रहा है। वहीं, अग्निशमन विभाग के बेहतरीन प्रबंधन के चलते फारेस्ट फायर और बाकी आगजनी की घटनाओं पर रेस्पॉन्स टाइम में भी सुधार किया है। उन्होंने लोगों से जंगलों को आगजनी से बचाने की और आग लगने पर तुरंत इसकी सूचना विभाग को देने की अपील की है।

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