पहाड़ पर मेहनत, देश की झोली में सोना

धर्मशाला 2015; 2017 और 2018 में एथलेटिक्स नेशनल कैंप का कर चुका है मेजबानी, बनाई अलग पहचान

 धर्मशाला —धौलाधार के आंचल में बसी खेल नगरी धर्मशाला के सिंथेटिक टै्रक ने एथलेटिक्स के क्षेत्र में प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश भर में अपना अलग स्थान बना लिया है। पहाड़ पर बना यह सिंथेटिक टै्रक समुद्र तल से 1457 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। इस मैदान पर अब तक एथलेटिक्स की राष्ट्रीय टीमें अभ्यास कर देश के लिए पदक जीत चुकी हैं। इस टै्रक पर मुख्य रूप से रेस वॉकिंग, मिडल व लांग रेस और 400 मीटर के महिला व पुरुष धावक अभ्यास करते हैं। हाई एल्टीट्यूट में लंबी दूरी के धावक कई माह तक पसीना बहाते हैं। 2018 में जकार्ता में आयोजित की गई एशियन गेम्स में 1500 मीटर दौड़ में भारत को स्वर्ण पदक दिलाने वाले जिनसन जॉनसन सहित चार गुना 400 मीटर रिले की विजेता एमआर पूवंमा और सरिताबेन गायक्वाड़ ने भी धर्मशाला में मेहनत की है। इसी तरह 32 वर्षीय सुधा सिंह, जो कि 3000 मीटर कैटेगरी की धाविका हैं, उन्होंने धर्मशाला में मेहनत कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। एशियन गेम्स में शॉटपुट पदक जीतने वाले तजिंद्रपाल सिंह तूर ने भी धर्मशाला में खूब अभ्यास किया है। धर्मशाला में द्रोणाचार्य अवार्डी एथलेटिक कोच जीएस भाटिया ने इन प्रतिभाओं को निखारने में अहम भूमिका निभाई है। जिनसन जॉनसन ने 2015 मार्च से जून तक धर्मशाला में अभ्यास किया था। इसी मैदान पर प्रदेश की बेटी सीमा ने अभ्यास कर वर्ष 2017 में 3000 मीटर में राष्ट्रीय रिकार्ड तोड़कर अपने नाम किया था। ‘दिव्य हिमाचल’ द्वारा द्रोणाचार्य अवार्ड से सम्मानित केहर सिंह पटियाल ने सीमा के साथ साथ अंतरराष्ट्रीय खिलाडि़यों के प्रशिक्षण में भी मदद की है।  वहीं खेल नगरी धर्मशाला में वर्तमान समय में कुछेक सुविधाओं का अभाव है, लेकिन अगामी समय में धर्मशाला के सकोह में अंतरराष्ट्रीय होस्टल का निर्माण किया जाएगा।

पहली बार 2015 में अभ्यास

एथलेटिक्स की राष्ट्रीय टीम ने पहली बार 2015 में धर्मशाला में अभ्यास किया था। इसके बाद 2017 और 2018 में भी राष्ट्रीय एथलेटिक्स टीम ने धर्मशाला सिंथेटिक ट्रैक और यहां की सड़कों पर दौड़कर कड़ी मेहनत की। खिलाड़ी एशियन गेम्स व एशियन चैंपियनशिप में बेहतरीन खेल का प्रदर्शन कर चैंपियन भी बने।

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