पांवटा प्रशासन के पास न गोताखोर,न एनडीआरएफ

पांवटा साहिब—प्रदेश के छोर पर बसा पांवटा साहिब नगर चारों और से नदियों से घिरा हुआ है। ये नदियां जहां पांवटा उपमंडल के लोगों के लिए आम दिनों मंे वरदान बनी हुई है वहीं बरसात के दौरान यह विनाशकारी भी हो जाती है। पांवटा साहिब प्रदेश का एकमात्र ऐसा नगर है जहां से होकर यमुना नदी बहकर निकलती है। नगर के पूर्व की और जहां गिरि नदी यमुना मे मिलती है, वहीं पश्चिम छोर पर बाता नदी पांवटा की पानी की दिक्कत दूर करती है। लेकिन बरसात के दिनों में यही नदियां विनाशकारी रूप धारण कर लेती है। कभी अपने तेज बहाव से भूमि कटाव के कारण जमीने तबाह करती है तो कभी लोगों को अपने भंवर में फंसा लेती है। बीते वर्ष बरसात के दौरान ऐसे मामले सामने आ चुके हैं। एक मामले मंे तो गिरि नदी में अचानक ही जलस्तर बढ़ने से आठ लोग नदी के बीच एक टापू पर फंस गए थे। ये तो गनीमत रही कि प्रषासन की मुश्तैदी के कारण कोई जानी नुकसान नहीं हुआ। लेकिन ऐसे हालात सामने आने पर पांवटा नगर के लोगों के जेहन मंे अकसर एक सवाल उठता रहता है कि यहां पर न तो स्थानीय प्रशासन के पास कोई गोताखोर है और न ही यहां एनडीआरएफ  की कोई टीम कार्य कर रही है। जबकि पांवटा जैसे नदियों से घिरे इस संवेदनशील नगर को बरसात के दौरान इनकी बड़ी जरूरत सामने आती है। करीब पांच साल पूर्व भी यहां के रामपुरघाट मंे इसी प्रकार कुछ मजदूर यमुना के बीच मंे फंस गए थे। उन्हंे भी कड़ी मशक्कत में बाद प्रशासन ने बाहर निकाला था। जानकार बतातें है कि पांवटा साहिब में बरसात में तो गोताखोरों और एनडीआरएफ  की जरूरत है ही। वैसे भी यहां साल भर प्रशासन के पास दो गोताखोर होने चाहिए। क्योंकि यहां पर यमुना स्नानघाट पर हर साल गर्मियों मंे एक दो मामले डूबने के आते हैं। मामले सामने आने के बाद पांवटा प्रशासन को उत्तराखंड से गोताखोर बुलाने पड़ते हैं जिससे कई बार काफी देर हो जाती है। स्थानीय बुद्विजीवियों अजय शर्मा, सिरमौर नागरिक कल्याण समीति के चेयरमेन आरएम रमौल, एमएस कैंथ, एनडी सरीन, समीर शर्मा, एनएन खतरी आदि का कहना है कि पांवटा साहिब मंे प्रशासन के पास आपदा से निपटने के लिए सारी सुविधाएं होनी चाहिए। विशेषकर बरसात के दौरान यहां पर दो महीने एनडीआरएफ की एक टीम तैनात होनी चाहिए या प्रशासन को दो महीने के लिए गोताखोर तैनात करने चाहिए। उधर, इस बारे एसडीएम पांवटा लायक राम वर्मा ने कहा कि प्रशासन जल्द ही बरसात के दौरान कुछ गोताखोरों को तैनात करेगा जो आपदा की स्थिति मंे काम आ सके। एनडीआरएफ की टीम के लिए जिला प्रशासन को लिखा जाएगा ताकि वह प्रदेश और केंद्र सरकार को इस बारे अवगत करवा सके।

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