पांवटा साहिब से चूड़धार तक पर्यटक

नाहन—प्रदेश की प्रमुख सैरगाहो मंे पर्यटन सीजन पीक पर होने से मैदानी भागों से पर्यटकों की आमद बढ् गई है। जिसके चलते प्रदेश की अन्य सैरगाहों की तरह जिला सिरमौर में भी पर्यटकों की आवाजाही से सैरगाहे पैक है। जिला सिरमौर के टूरिज्म सर्किट की बात की जाए तो यहां पांवटा सहिब गुरुद्वारा से लेकर चूड़धार तक के धार्मिक पर्यटन स्थल मे इन दिनों पर्यटकों का तांता लगा हुआ है। वहीं उतरी भारत की प्रमुख धार्मिक पयर्टन स्थल श्रीरेणुकाजी में सबसे अधिक टूरिस्ट पीक सीजन 15 मई के बाद आंका गया है। श्रीरेणुकाजी के पर्यटन मे 90 प्रतिशत तक आक्यूपेंसी वीक एंड और समर सीजन के पर्यटन मंे हो रही है। वहीं हिल स्टेशन हरिपुरधार और चूड़धार की टै्रकिंग के लिए भी पर्यटकों ने हजारों की संख्या मे रुख किया है। मैदान तपने से हिमाचल की सैरगाह नहीं जहां पर सैलानियों ने दस्तक नहीं दी है। वहीं अब प्रदेश की प्रमुख सैरगाहों के अलावा अनछुए पर्यटन स्थल भी सैलानियांे की पंसद बनने लगे है। बढ़ते पर्यटन के साथ जिला की सैरगाहों मे मानवीय दबाव भी बढ़ा है। तीर्थ श्रीरेणुकाजी मे पर्यटन सीजन चरम पर होने से यहां के ददाहू बाजार मे जहां जाम की समस्या आम हो चली है। वहीं पर्यटकों की संख्या यहां प्रतिदिन 400 से 500 वाहनों की रोजाना हो रही है। जिसके चलते पर्यटकों का पार्किंग की समस्या का भी सामना रेणुकाजी मंे करना पड़ रहा है। जबकि तीर्थ स्थल मे स्वच्छता पर भी सवाल खड़े हो रहे है। सीइओ रेणुकाजी विकास बोर्ड दीपराम शर्मा ने बताया कि पीक सीजन मे भारी संख्या मे पर्यटक रेणुकाजी पहुंच रहे है। वहीं तीर्थ मंे संचालित सुलभ शौचालय तथा बायोटायलट की हालात खराब होने के चलते बोर्ड को पर्यटकों की खरी खोटी भी सुननी पड़ रही है।सुलभ शौचालय की दुर्दशा वन्य प्राणी विभाग द्वारा रुचि न लेने पाने के कारण अधर में लटकी है। जबकि बायोटायलट की हालात भी खस्ता है। सिरमौर टूरिज्म का कार्यभार देख रहे एजीम बड़ोग योगेश कश्यप ने बताया कि जिला सिरमौर मे भी पर्यटकों की आमद के साथ आक्यूपेंसी फूल हुई है। वहीं पर्यटक फूल आक्यूपेंसी के चलते अन्य स्थानों को भी लौटते है, जिसकी फीडबैक उन्हंे मिलती है। मगर पर्यटन विकास का मुद्दा सरकार को ही देखना है। उधर जिला की 11968 फीट की पर्वत श्रंखला चूड़धार पर प्रतिदिन दो से तीन हजार की संख्या मे पयर्टक ट्रैकर ठंडी वादियों मंे पहुंच रहे है। चूडेश्वर सेवा समिति की अध्यक्ष बलदेव चौहान के मुताबिक समिति ने पर्यटकों के लिए सभी प्रबन्ध करने की कोशिश के साथ लंगर व्यवस्था को चालू रखा हुआ है। मगर अत्यधिक संख्या होने के चलते सराय और ठहराव में दिक्कतें भी आ रही है।

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