पानी की व्यवस्था के लिए फिर होंगे टेंडर

शिमला -प्रदेश की हजारों बस्तियों और उनमें रहने वाले लाखों लोगों को पर्याप्त पानी की व्यवस्था के लिए मंजूर ब्रिक्स प्रोजेक्ट में दोबारा टेंडर करने होंगे। सूत्रों के अनुसार 3267 करोड़ रुपए का यह प्रोजेक्ट चालू करने के लिए यहां टेंडर किए गए थे, लेकिन प्रस्तावित लागत से अधिक के रेट मिले हैं। इस कारण से रिटेंडरिंग की नौबत आ गई है। इतना ही नहीं सालों से प्रस्तावित प्रोजेक्ट चालू करने में अभी और देरी होगी। राज्य की हजारों बस्तियों के लिए बनाई गई यह परियोजना बेहद महत्त्वपूर्ण है। हिमाचल में इस तरह की विदेशी फंडिंग से अभी तक कोई प्रोजेक्ट नहीं है। पानी के इस प्रोजेक्ट के लिए पहले चरण में 700 करोड़ रुपए की धनराशि मिलनी है। इससे यहां करीब 500 बस्तियों में काम शुरू हो जाएगा। इसमें नई पेयजल स्कीमें बनाने के साथ पुरानी स्कीमें अपग्रेड भी की जाएंगी। मापदंडों के अनुसार प्रति व्यक्ति पानी उपलब्ध करवाया जाना है, जो अभी तक नहीं हो रहा है। ब्रिक्स प्रोजेक्ट की पूरी डीपीआर तैयार हो चुकी है। अलग-अलग जिलों के लिए अलग-अलग डीपीआर बनाई गई है, जिसके मुताबिक यहां प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा। प्रदेश की ऐसी बस्तियों को इस परियोजना से सबसे अधिक फायदा मिलेगा, जहां अभी तक पानी नहीं पहुंचा है, वहीं आंशिक रूप से पानी जिन बस्तियों में पहुंचा है, उनमें भी पानी की पर्याप्त व्यवस्था होगी। आईपीएच विभाग को इसके लिए री-टेंडर करने के लिए कहा गया है। इसमें करीब तीन महीने का समय तो लगेगा ही। यदि उसके बाद भी कंपनियां प्रस्तावित लागत के मुताबिक रेट नहीं देती हैं, तो फिर से टेंडर होंगे।

वर्क अवार्ड करने के लिए जल्दबाजी

विभाग इस प्रोजेक्ट के वर्क अवार्ड करने के लिए जल्दबाजी में है, क्योंकि परियोजना सालों से लंबित पड़ी है। इसके टेंडर होने के बाद ही ब्रिक्स से पैसा भी आना शुरू होगा। आईपीएच विभाग के पास ब्रिक्स के साथ दो अन्य महत्त्वपूर्ण प्रोजेक्ट भी हैं, जिनमें से एक 4751 करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट भी है, जिसके लिए एडीबी से पैसा लिया जाना प्रस्तावित है। बहरहाल, ये दोनों प्रोजेक्ट शुरू होते हैं, तो ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की दिक्कत पेश नहीं आएगी। दूरदराज के गांवों तक पानी पहुंचाना आसान हो जाएगा।

 

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