‘पापा’ ने बचाई प्रदूषण से घुट रही डमटाल सिटी

पॉल्यूशन अवेटिंग प्लांट्स अभियान के तहत रोपी गई पौध ने जहरीली हवा को दी पटकनी

शिमला – प्रदूषण से घुट रहे हिमाचल के सात शहरों में से डमटाल सिटी को हिमाचल सरकार के पॉल्यूशन अवेटिंग प्लांट्स अभियान (पापा) प्रोजेक्ट ने बचा लिया है। इस प्रोजेक्ट के तहत रोपित पौधों ने डमटाल शहर की जहरीली हवा को नष्ट कर दिया है। इस शहर के पर्टिकुलेट मैटर 80 से घटकर 58 रह गया है। इस चमत्कार के बाद हिमाचल सरकार ने कालाअंब, नाहन, बद्दी, परवाणू, नालागढ़ और सुंदरनगर में भी पापा प्रोजेक्ट को गति देने के निर्देश दिए हैं। इसके चलते अब तक एक लाख 70 हजार पौधे रोपित कर चुके प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अब इन सभी सातों शहरों में और प्लांटेशन के लिए फंड जारी कर दिया है। जाहिर है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने राज्य के आठ शहरों में ऑक्सीजन के चार लाख पौधे रोपित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस कड़ी में ऊना शहर को भी जोड़ने का टारगेट है। हालांकि इस साल ऊना को छोड़ कर अन्य सभी सातों शहरों के लिए ऑक्सीजन के प्लांट्स जारी कर दिए हैं। पापा प्रोजेक्ट के तहत प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ऑक्सीजन के प्लांट लगा रहा है। इसके अलावा फाइलों तथा फर्श की धूल से बचने के लिए प्रदेश सचिवालय और हाईकोर्ट में इंडोर प्लांट्स स्थापित किए गए हैं। राज्य की जयराम सरकार ने पॉल्यूशन अवेटिंग प्लांटस अभियान (पापा) प्रोजेक्ट  को पिछले साल पर्यावरण दिवस पांच जून को शुरू किया था। लिहाजा एक साल के अभियान में डमटाल शहर से मिले सार्थक परिणामों के बाद पोल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने इस अभियान को गति देना शुरू कर दी है। दीगर है कि आईआईटी कानपुर की सर्वे रिपोर्ट में कहा गया है कि हिमाचल प्रदेश के कालाअंब, नाहन, बद्दी, परवाणू, नालागढ़, सुंदरनगर और डमटाल में प्रदूषण के चलते सांस लेना मुश्किल हो गया है। आने वाले समय में राज्य के इन सात शहरों में जीना दुश्वार हो जाएगा। इस रिपोर्ट पर संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार ने पापा प्रोजेक्ट के तहत उक्त सभी शहरों में ऑक्सीजन के पौधे रोपित करने का निर्णय लिया है।  हिमाचल के आठ शहरों में पीपल, बरगद, नीम, अर्जुन, वहेडा, जामुन, कचनार, अमलताश तथा आंवला सहित दो दर्जन प्रजातियों के ऑक्सीजन वाले पौधे रोपित किए जा रहे हैं। प्रत्येक शहर में पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड 50 हजार पौधे रोपित करने का लक्ष्य रखा है। इस अभियान में राज्य के आठ शहरों में 4 लाख ऑक्सीजन देने वाले पौधों का रोपण होगा।  शोध रिपोर्ट में कहा गया है कि विशेष प्रजाति के पौधारोपण से शुद्ध आबोहवा मिलेगी।

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