पालमपुर में सेना छावनी के लिए जमीन के मुआवजे पर अड़ी बात

सरकार मानती है अपना हक, लोगों को नहीं मिलेगा मुआवजा

शिमला – पालमपुर के चचियां में चाय बागान का लैंड यूज बदलकर सेना को छावनी के लिए जमीन देने के मामले की फाइल राजस्व विभाग को वापस आ गई है। राजस्व विभाग ने कानून विभाग की राय के बाद मामला एडवोकेट जनरल को भेजा था। सूत्र बताते हैं कि कानून विभाग की राय पर राजस्व विभाग को कुछ आपत्तियां थीं, जिसके चलते एडवोकेट जनरल को यह मामला भेजा गया। चूंकि मामला सेना से जुड़ा है, लिहाजा जमीन तो सरकार न भी देना चाहे तो भी उसे देनी होगी, क्योंकि अनिवार्य अधिग्रहण के दायरे में इसे लिया जा सकता है। सूत्र बताते हैं कि राजस्व विभाग ने इस मामले में साफ कर दिया है कि यदि सेना यहां पर चाय बागान का अधिग्रहण करती है तो जमीन अधिग्रहण का मुआवजा सरकार को मिलेगा न कि सीधे लोगों को क्योंकि असल में इस जमीन की मालिक खुद सरकार है। चाय बागानों पर लागू लैंड सिलिंग एक्ट में यही प्रावधान है। ऐसे में राज्य विभाग इस मसले को लेकर अड़ा हुआ है और सरकार को उसे सुझाव पर ही आगे कदम बढ़ाना होगा। बता दें चचियां में सेना की ओर से छावनी बनाए जाने को लेकर प्रस्ताव मिला था और उन्होंने चाय बागानों के अधिग्रहण को कहा था। गृह मंत्रालय ने यहां पर 88 हैक्टेयर जमीन की मांग रखी है, जिस पर अब तक कोई फैसला नहीं हो सका है। इतना ही नहीं, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जो चाय बागान मांगे हैं, यदि उन्हेें दिया जाएगा तो इसके लिए उसका लैंड यूज बदलना ही पड़ेगा। ऐसा होता है तो कई दूसरे मामले सरकार के सामने खड़े हो जाएंगे। इस संबंध में करीब एक साल पहले गृह मंत्रालय से सरकार को पत्र आया था, जिस पर अभी तक फाइल इधर से उधर घूम रही है। दो दफा इस पर कानून विभाग से राय मांगी जा चुकी है। फिर एडवोकेट जनरल की राय भी आ गई है। उन्होंने भी इस जमीन का असली हकदार सरकार को ही माना है। हिमाचल प्रदेश लैंड सिलिंग एक्ट-1972 चाय बागान वाली भूमि का इस्तेमाल अन्य गतिविधियों के लिए करने की इजाजत कतई नहीं देता है। सरकार यहां के लैंड यूज को बदलने की अनुमति देगी तो ही जमीन सेना को जा सकती है, लेकिन अधिग्रहण के बाद मुआवजा किसे मिलेगा, यह बड़ा सवाल है। जो लोग इस चाय बागान को बेचने की फिराक में हैं, वे चाहते हैं कि मुआवजा उन्हें मिले, लेकिन राजस्व विभाग ने इसमें कानूनी सवाल खड़े कर दिए हैं। सैनिक छावनी स्थापित करने का मामला देश की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। यही नहीं, राज्य सरकार भी समय-समय पर केंद्र सरकार के समक्ष हिमाचल की सीमाओं की सुरक्षा को पुख्ता करने की मांग करती रही है। राज्य सरकार चंबा जिला में आईटीबीपी की तैनाती की मांग लंबे समय से कर रही है। ऐसे में यह माना जा रहा है कि गृह मंत्रालय के चचियां में सेना छावनी बनाने के प्रस्ताव पर राज्य सरकार को कोई आपत्ति नहीं हो सकती है, बशर्ते मुआवजे के हकदार का फैसला हो जाए। सूत्रों की मानें तो यह मामला जल्दी ही सरकार के ध्यान में जाएगा। कैबिनेट इस पर सभी सुझावों को ध्यान में रखकर वापस गृह मंत्रालय को इस संबंध में लिखेगी। देखना होगा कि सरकार आगे क्या निर्णय लेगी। क्या चाय बागान को रखने वाले लोगों को कुछ मिलेगा या नहीं।

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