पैकेज ऑफ प्रैक्टिस प्रकाशित करेगा कृषि विवि

पालमपुर—प्रदेश कृषि विवि शून्य लागत प्राकृतिक खेती के अन्तर्गत मक्का, गेहूं, धान, चना, मसर, तथा मिलेट पर पैकेज ऑफ प्रैक्टिस प्रकाशित करेगा ताकि प्रदेश के किसानों तक तकनीकें पहुंच सकें। पद्मश्री सुभाष पालेकर के ‘‘प्राकृतिक खेती तकनीकों का मूल्यांकन परिशोध व प्रसार’’ मॉडल के अनुरूप ही 159 लाख रुपए की एक परियोजना हाल ही में प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय को स्वीकृत हुई है जिसे विवि शीघ्र ही कार्यान्वित करने की प्रक्रिया में लगा है। इसके साथ ही प्रदेश की परंपरागत खेती तथा गाय के गोबर व मूत्र द्वारा तैयार फसलों का मात्रात्मक व तुलनात्मक अध्ययन भी किया जाएगा। इस विधा के अंतर्गत खेती प्रोत्साहित करने का दूसरा उद्देश्य है कि मृदा स्वास्थ्य के सूचकों व जल प्रयोग का लंबे समय तक उपयोग दर्शाएगा कि इस विधा में कितने कम जल की आवश्यकता होती है। कृषि विवि प्राकृतिक खेती के अंतर्गत पौध रोगों व कीट प्रबंधन पर भी तकनीकें किसानों को मुहैया करवाएगा। प्राकृतिक खेती के अंतर्गत अन्न उत्पादन रसायन मुक्त होगा, जिसमें बहुत अधिक एंटी-ऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर होते हैं। एंटी-ऑक्सीडेंट गुणों वाले खाद्य मानव शरीर को कई रोगों से बचाते हैं। इस वर्ष शून्य लागत प्राकृतिक खेती को एक आधुनिक विज्ञान व प्रौद्योगिकी केंद्र में तबदील करने हेतु भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद को 20 करोड़ रुपए की प्रायोजना का प्रारूप वित्तीय स्वीकृति हेतु प्रेषित किया गया है। प्रदेश में शून्य लागत प्राकृतिक खेती के परिणाम प्रोत्साहजनक रहे हैं और विद्यार्थी भी इस विधा में काम करने की ओर अग्रसर हो रहे हैं। प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय द्वारा शून्य लागत खेती के गुरुकुल मॉडल को अपनाने व इस पर साहित्य तैयार करने के लिए जनवरी 2018 में यहां शून्य लागत खेती के एक आदर्श केंद्र की स्थापना की गई। प्रदेश सरकार से 300 करोड़ रुपए की सहायता प्राप्त हुई है ताकि शून्य लागत खेती पर शोध सुदढ़ किया जा सके और इसे राष्ट्रीय स्तर पर विस्तारित किया जा सके।

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